वहीं मानसी नेगी को वन दरोगा का पद दिया गया था। इसके लिए वह वेरिफिकेशन कराने भी गई थीं, लेकिन पद के लिए इंटर साइंस के नियम ने उनकी राह रोक दी। बताया कि उन्होंने फिजिकल एजुकेशन से स्नातक किया है। वर्तमान में बीपीएड कर रही है मगर उनसे कहा जा रहा है कि अब दोबारा साइंस से इंटर करना पड़ेगा, जिसके लिए चार साल का समय भी दिया जा रहा है। मानसी ने सवाल करते हुए कहा कि जब वह ग्रेजुएशन कर चुकी हैं, तो दोबारा इंटर क्यों करें, क्यों पांच साल पीछे जाए। इसलिए उन्होंने वन विभाग में ज्वाइनिंग देने से मना कर दिया। उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता के अनुसार युवा कल्याण विभाग, गृह विभाग, शिक्षा विभाग को प्राथमिकता सूची में रखा था।
रजत पदक विजेता ने सीएम को भेजा पत्र
आउट ऑफ टर्न नियुक्ति के मामले में स्वर्ण पदक विजेता को नौकरी मिलने और रजत पदक जीतने के बावजूद उनको नौकरी नहीं मिलने पर टनकपुर निवासी इमरान अली ने अब मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की शिकायत की है। इमरान ने बताया कि उन्होंने 2017 में कनाडा में आयोजित कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार से स्कॉलरशिप भी मिली थी। जब आउट ऑफ टर्न नियुक्ति के तहत उन्होंने आवेदन किया तो किसी पद पर नियुक्ति नहीं मिली। बता दें कि कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर अल्मोड़ा की शुभांगिनी साह को खेल विभाग में सहायक कोच के पद नियुक्ति मिली है।
मानसी नेगी ने वन विभाग में मना कर दिया था, जिसके संबंध में वन विभाग से पत्र मिलने के बाद अब उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुसार उनहें गृह विभाग में नियुक्ति देने के संबंध में पत्र भेजा गया है। दूसरी ओर प्रियंका चौधरी से भी वेतन और पद के संबंध में बात की गई थी। उन्हें शासनादेश और खेल नीति के अनुसार पद आवंटित किया गया था, जबकि रजत पदक पर नौकरी नहीं मिलने का मामला जब सामने आएगा, तब उसको देखा जा सकेगा। -जितेंद्र सोनकर, खेल निदेशक।
हमारा उद्देश्य खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करना और हर सुविधा उपलब्ध कराना है। अभी नियमानुसार जो छूट की व्यवस्था है, वही की गई है, लेकिन यदि कोई परेशान है तो मैं मदद जरूर करुंगा। खिलाड़ियों को नौकरी दिलाने के लिए नियमानुसार सहयोग किया जाएगा। खिलाड़ियों के भविष्य और हित को देखते हुए अगर संभव हुआ तो नियमों में भी यथोचित परिवर्तन किया जा सकता है। -अमित सिन्हा, प्रमुख सचिव खेल।