नैनीताल। मानसून सीजन के दौरान नैनीताल और इसके आसपास का क्षेत्र आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में जहां एक ओर जिला प्रशासन ने राहत और बचाव के इंतजाम पुख्ता कर दिए हैं वहीं दूसरी ओर शासन ने भी यहां नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फार्म (एनडीआरएफ) की तैनाती कर दी है। यह पहला मौका है जब नैनीताल जिले में एनडीआरएफ की तैनाती की गई है। इस मानसून सीजन में यदि कहीं कोई आपदा आती है तो एनडीआरएफ की टीम त्वरित रूप से राहत और बचाव कार्य में जुट जाएगी और इसका लाभ आपदा प्रभावितों को मिलेगा।
बता दें कि मानसून सीजन के दौरान नैनीताल जिले में पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा रहता है जबकि मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ का। ऐसे में अब तक राहत और बचाव के कार्य संबंधित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों के अलावा एसडीआरएफ व आपदा मित्र ही करते थे। एसडीआरएफ की दो टीमें यहां पहले से ही मौजूद हैं जिनमें एक टीम राजभवन परिसर में कैंप करती है जबकि दूसरी टीम छड़ा खैरना में। पूर्व के वर्षों में जरूरत पड़ने पर ही एनडीआरएफ की टीम को बुलाया जाता था।
अब शासन ने यहां 23 सदस्यों वाली एनडीआरएफ की टीम भी तैनात कर दी है। इसे भवाली नगर पालिका क्षेत्र के एक बैंक्वेट हाॅल में ठहराया गया है। भवाली चूंकि मैदान और पहाड़ का मध्य क्षेत्र है लिहाजा जरूरत पड़ने पर एनडीआरएफ की टीम यहां से कहीं को भी आसानी से पहुंच सकेगी।
इस बार मानसून सीजन के दौरान शासन स्तर से एनडीआरएफ की एक टीम को नैनीताल जिले में तैनात किया गया है। जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों में भी उसकी मदद ली जा सकती है।
अशोक जोशी अपर जिलाधिकारी नैनीताल
तहसील एवं जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष सक्रिय
नैनीताल। जिला स्तर पर जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र 24 घंटे की तर्ज पर संचालित है। सभी तहसीलों में नियंत्रण कक्षों को संचालित करने के लिए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। मानसून के दौरान (15 जून से 30 सितंबर तक) सभी तहसीलों के नियंत्रण कक्ष चौबीस घंटे चालू रहेंगे।
जिले भर में संचार व्यवस्था भी चाकचौबंद
नैनीताल। आपदा और उससे संबंधित सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए जिला स्तर पर तीन लैंड लाइन और एक मोबाइल फोन सक्रिय है। पुलिस, वन विभाग और कंट्रोल रूम को वायरलेस दिए गए हैं। दो सैटेलाइट फोन सक्रिय हैं। घारी एवं कोश्या कुटौली तहसीलों को दो-दो और शेष तहसील में एक एक सैटेलाइट फोन दिया गया है। इसके अलावा मुक्तेश्वर, बेतालघाट एवं भवाली थाने (चौकी रामगढ़) में भी एक एक सैटेलाइट फोन स्थापित किया गया है। सभी तहसीलों एवं सुदूरवर्ती पटवारी चौकियों ओखलकांडा, पतलोट और ढोलीगांव में स्टैटिक वायरलेस सेट स्थापित किए गए हैं। सभी उपजिलाधिकारियों को भी एक-एक वायरलेस हैंडसेट और वाॅकी टाॅकी के चार-चार सेट उपलब्ध कराए गए हैं।
120 स्लाइडिंग जोन व 96 क्रोनिक जोन चिह्नित
नैनीताल। जिला प्रशासन ने जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 120 स्लाइडिंग जोन और 96 क्रोनिक लैंडस्लाइडिंग जोन के रूप में चिह्नित किए हैं। सड़कों को खोलने के लिए अलग-अलग स्थानों पर 38 जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं। इसके अलावा 36 गैंग, नौ ट्रक/ टिप्पर, चार कंप्रेशर और छह वुडकटर भी उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्य मार्गों के बाधित होने की दशा में कुल 36 वैकल्पिक मार्ग भी चिह्नित किए गए हैं। जिले में कुल 42 स्थान हैलीपैड के लिए चिह्नित किए गए हैं।
राहत और बचाव को लेकर ये तैयारियां हुईं
-आपदा की स्थिति में निगरानी व राहत बचाव कार्यों के लिए राजस्व विभाग की 48 तथा सिंचाई विभाग की बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं।
- 49 राजकीय भवन ऐसे चिह्नित किए गए हैं जहां विस्थापन की स्थिति में लोगों को शिफ्ट किया जा सके।
- सभी खाद्य गोदामों व दूरस्थ सरकारी सस्ते गल्ला में तीन माह का राशन भेजा जा चुका है।
- आकस्मिक परिस्थितियों के लिए एक हजार लीटर पेट्रोल व दो हजार लीटर डीजल के अलावा कुकिंग गैस की व्यवस्था।
- जिले में कुल 23 वाहन, 108 एंबुलेंस एवं 12 चिकित्सकीय विभागीय एंबुलेंस विभिन्न केंद्र और स्थलों पर तैनात की गई हैं।