जंगल में लगने वाली आग को वन पंचायत में निवास करने वाले ग्रामीण बुझाएंगे। इसके लिए वन विभाग की ओर से उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश में 13 हजार वन पंचायत हैं। जिला मुख्यालय में फाॅरेस्ट ट्रेनिंग अकादमी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा।
एफटीए की निदेशक डॉ. तेजिस्वनी पाटिल ने बताया कि जंगल की आग पर काबू पाने के लिए जनसहयोग की जरूरत होती है। यह कार्य और व्यवस्थित तरीके से हो सके, जिसके लिए वन पंचायतों के लोगों को प्रशिक्षित करने के साथ किट देने का फैसला किया गया है।
इसके तहत राज्य के 11 पर्वतीय जिलों में 10-10 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम में 50-50 लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें आग बुझाने के तरीके के साथ ही रेस्क्यू करने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। एक किट भी वन पंचायतों को देने का फैसला किया गया।
कई विभाग शामिल होंगे
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ विभाग के भी कर्मचारी शामिल होंगे। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। अकादमी की उप निदेशक डॉ. अभिलाषा ने बताया कि एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इसमें जंगल की आग को बुझाने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ रेस्क्यू करने और प्राथमिक उपचार की भी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू करने की तैयारी है।
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कुमाऊं के जंगलों में 12 जगह लगी आग
कुमाऊं के जंगलों में 24 घंटे में जंगल में आग लगने की 12 घटनाएं हुई हैं। इसमें छह घटनाएं आरक्षित और छह सिविल सोयम वन क्षेत्र में हुईं। इनमें 13 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंचा। वहीं, प्रदेश में अब तक जंगल में आग लगने की 139 घटनाएं हो चुकी है, इसमें 201 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंचा था।