वन विभाग रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में फोरेंसिक लैब बनायेगा। डीएफओ के अनुसार शासन से अनुमति लेने के बाद हैदराबाद की सेंटर फार सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी की शाखा लैंकन्स नामक संस्था से एमओयू भी किया जाएगा।
जिन हथियारों से वन्यजीवों का शिकार होता है, उस हथियार, मीट आदि को बरामद करता है। पर खून, मीट वास्तव में वन्यजीव का है, इसे साबित भी करना होता है।
इसके लिए वन विभाग बरामद वस्तुओं को लैब में भेजती है, जहां से जांच रिपोर्ट आती है। ऐसे में जांच लैबों में वस्तुओं का अंबार लग गया है।
डीएफओ डा. तेजस्विनी पाटिल कहती हैं कि राज्य की पहली वन्यजीव से जुड़ी फोरेंसिक लैब रानीबाग में बनाने का निर्णय लिया गया है।