रामलीला के रंगमंच पर किरदारों के चेहरे बदल रहे हैं। जिस मंच पर कभी पुरुष ही राम, रावण, सीता और मंथरा के रूप में नजर आते थे वहां अब बेटियां पुरुषोत्तम श्रीराम का तेज भी दिखा रही हैं और दशानन के अहंकार की हुंकार भी भर रही हैं।
हल्द्वानी और नैनीताल की रामलीलाओं में बेटियों ने अभिनय की परंपरागत सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए ऐसे किरदारों को अपनाया है जिन्हें निभाने का जिम्मा लंबे समय तक पुरुषों के हिस्से रहा। कोई राम बनकर मर्यादा का संदेश दे रही है तो कोई रावण बनकर मंच पर दर्प और रौद्र भाव को जीवंत कर रही है।
- 21 वर्षीय सौम्या पंत चार साल से रामलीला से जुड़ी हैं। वह ऊंचापुल रामलीला में पहली बार सीता की भूमिका निभा रही हैं। उनकी बहन रोली पंत उर्मिला बनी हैं। उन्हें पिता के राम का किरदार निभाने से प्रेरणा मिली।
- 16 वर्षीय सुप्रभा पंत उत्थान मंच में होने वाली महिला रामलीला में राम की भूमिका निभा चुकी हैं। उन्होंने बचपन में अहिल्या और गौरी फिर भरत व सीता की भूमिका निभाई। परिवार के प्रोत्साहन से अभिनय जारी रखा।
- 49 वर्षीय रितु कांडपाल 15 वर्षों से मंथरा का किरदार निभा रही हैं। पिछले चार साल से हीरानगर रामलीला में ताड़का और जोकर की भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग किरदारों से सीखने को मिलता है।
- 38 वर्षीय हनी चार साल से रामलीला से जुड़ी हैं। नारद, सूर्पणखा और कैकेयी के बाद इस वर्ष वह नारद, बाणासुर और सुमित्रा की भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि रामलीला ने उन्हें अभिनय का मंच दिया।
- 54 वर्षीय गीता दरम्वाल चार साल से रावण की भूमिका निभा रही थीं। इस साल की रामलीला में वह शबरी बनी हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां हर काम कर सकती हैं। बस दृढ़ संकल्प और परिवार का सहयोग जरूरी है।