हल्द्वानी। कोलकाता के हावड़ा से काठगोदाम के बीच नियमित चलने वाली बाघ एक्सप्रेस आए दिन लेट होने के कारण यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है। ट्रेन का हावड़ा से काठगोदाम आने का समय 35 घंटे तय है लेकिन ट्रेन पूरे महीने प्रतिदिन औसतन दो घंटा लेट हो रही है।
भारतीयों ट्रेनों का लेट होना यात्रियों के लिए आम बात है। कुमाऊं के प्रवेश द्वार काठगोदाम से दिल्ली, लखनऊ, देहरादून आदि रूट पर सात से अधिक ट्रेनें चलती है। इसमें सबसे लंबे रूट की ट्रेन बाघ एक्सप्रेस है। बाघ एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तरप्रदेश से होकर उत्तराखंड पहुंचने में कई रेलवे लाइन बदलती है।
रेल लाइन बदलने के दौरान ट्रेन का काफी समय बरबाद होता है। कई बार ट्रेन अपने निर्धारित स्टेशन से ही देरी से चलती है जिसका खामियाजा यात्रियों को सफर में ज्यादा समय देकर भुगतना पड़ता है। यह ट्रेन अगस्त में रोजाना औसतन दो घंटा लेट रही।
ऑक्यूपेंसी के मामले में सबसे प्रसिद्ध ट्रेन है बाघ एक्सप्रेस
बाघ एक्सप्रेस ने सबसे अधिक भीड़-भाड़ (ऑक्यूपेंसी) वाली ट्रेन के मामले में कीर्तिमान स्थापित किए हैं। बाघ एक्सप्रेस में 100 सीटों के लिए 250 से ज्यादा दावेदार हैं। यानी हर सीट के लिए करीब दो से ज्यादा लोग टिकट बुक करा रहे हैं।
कोट
बाघ एक्सप्रेस इस्टर्न रेलवे से कई जोनल रेलवे पार करते हुए नॉर्थ इस्टर्न रेलवे जोन पर इज्जतनगर मंडल के काठगोदाम स्टेशन के लिए टर्मिनेट होती है। नॉर्थ इस्टर्न रेलवे, इस्टर्न रेलवे समेत अन्य जोन पर काफी देर ब्लॉक रहता है। बिहार के कई स्टेशनों पर चेन पुलिंग की घटना होती हैं। ऐसे में बाघ एक्सप्रेस ट्रेन अपने समय से देरी से पहुंचती हैं। - राजेंद्र सिंह, इज्जतनगर मंडल, पीआरओ।