बनभूलपुरा हिंसा को 10 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उस मंजर से लोग अभी तक उबर नहीं पाए हैं। ऐसा लगा कि घर के अंदर भी बचने की कोई जगह नहीं है। कई घरों में अभी भी इसके निशान बाकी है।
मौहम्मद शुजाउद्दीन बनभूलपुरा थाने के निकट मेडिकल स्टोर चलाते हैं। वहीं उनका चार मंजिला मकान है। उस दिन को याद कर परिजन सहम जाते हैं। बताया कि 8 फरवरी को हंगामा होते ही दुकान बंद कर घर में चले गए थे। वह परिवार के साथ तीसरी मंजिल पर थे और बाहर देखने की कोशिश कर रहे थे। अंधेरा होने के कारण कुछ नजर नहीं आ रहा था। कुछ समय बाद बाहर आग ही आग दिखने लगी तो डर लगने लगा। अचानक दूसरी मंजिल पर जोर का धमाका हुआ तो पूरा परिवार सहम गया। किसी तरह हिम्मत जुटाकर नीचे कमरे में आये और टॉर्च की रोशनी में देखा तो शीशा टूटा पड़ा था, उसमें दो छेद बने थे। दहशत में वह ऊपर की मंजिल पर चले गए। दूसरे दिन बाहर बालकनी में निकलकर देखा तो दुकान के बाहर खड़ीं उनकी दोनों स्कूटी जली हुई थीं और दीवारों पर निशान बने हुए थे।
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शीशा तोड़कर अंदर आई गोली एसी में धंसी थी, जिससे एसी भी खराब हो गया। अंदर 35 फीट पीछे तक दीवार पर गोली के निशान बन गए थे। इस हिंसा से बच्चों में दहशत थी, इस कारण तीन दिन बच्चे नीचे के कमरे में नहीं आ सके। बताया कि नुकसान की जानकारी पुलिस को भी दे दी है।