नैनीताल। आप नैनीताल में रहते हैं तो अग्निकांड से निपटने के लिए अपने इंतजाम दुरुस्त रखें। आपात स्थिति में सरकारी मदद का इंतजार करना नुकसान बढ़ा सकता है, क्योंकि ऊंचाई वाले क्षेत्र में फायर बिग्रेड की गाड़ियां पहुंच नहीं पाती हैं और शहर के कई हाइड्रेंट चालू हालत में नहीं हैं। कुछ दुरुस्त हाइड्रेंट से भी पानी मिलने में समय लगने के कारण सब खाक हो जाता है।
नैनीताल शहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां माल रोड और मुख्य सड़कों के किनारे तक ही दमकल का बड़ा वाहन पहुंच सकता है। बाजार और ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक फायर ब्रिगेड की छोटी गाड़ी भी बमुश्किल पहुंच पाती है। छोटी गाड़ी में पानी पर्याप्त नहीं होता है और जरूरत होती है फायर हाइड्रेंट की। शहर में 83 फायर हाइड्रेंट में 20 खराब हैं और 15 जमीन के नीचे दब चुके हैं।
चालू हालत वाले 48 हाइड्रेंट में भी जरूरत पड़ने पर पानी नहीं मिलता है। यह स्थिति इसलिए पैदा हो गई है क्योंकि पूर्व के वर्षों में फायर हाइड्रेंट के लिए अलग से पानी की लाइनें थी जिनमें चौबीसों घंटे पानी की सप्लाई चालू रहती थी। अब हाइड्रेंट के लिए अलग से पानी की लाइन नहीं है बल्कि जल संस्थान ने उन लाइनों में हाइड्रेंट जोड़ दिए हैं जिनसे उपभोक्ताओं को पेयजल आपूर्ति की जाती है। इन लाइनों में पानी की सप्लाई रोस्टर के अनुसार दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम को होती है। अब यदि ऐसे में कहीं आग लग जाए तो दमकल कर्मियों को जल संस्थान से वार्ता करनी पड़ती है। कोढ़ में खाज यह कि पानी सीधे लाइनों में नहीं आता बल्कि पहले संबंधित क्षेत्र के टैंक में जाता है और टैंक भरने के बाद संबंधित क्षेत्र की लाइन में। जब तक हाइड्रेंट में पानी पहुंचता है तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका होता है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी नैनीताल, किशोर उपाध्याय ने बताया कि पहले हाइड्रेंट के लिए अलग से लाइन होती थी और उसमें 24 घंटे पानी चलता था। अब न तो अलग से लाइन है और न ही खराब हाइड्रेंट ठीक कराए जा रहे हैं। कई बार जल संस्थान के अधिकारियों को पत्र भेजे गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
ईई कुमाऊं जल संस्थान नैनीताल, विपिन कुमार चौहान ने बताया कि खराब हाइड्रेंट को ठीक कराने के लिए अग्निशमन विभाग के साथ संयुक्त सर्वे किया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन को लगभग 36-37 लाख रुपये का स्टीमेट भेजा है। बजट मिलने के बाद खराब हाइड्रेंट ठीक कराए जाएंगे। पूर्व में हाइड्रेंट के लिए अलग से पानी की लाइन थी जिनमें पानी चौबीस घंटे चलता था। अब पेयजल आपूर्ति रोस्टर के आधार पर होती है।
कुमाऊं आयुक्त नैनीताल, दीपक रावत ने कहा कि अग्निकांड के लिहाज से नैनीताल संवेदनशील है। लिहाजा शीघ्र ही खराब हाइड्रेंट ठीक करवाए जाएंगे और उनसे संबंधित लाइन में पानी की आपूर्ति की व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा। इस संबंध में संबंधित विभागों के दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।