नैनीताल। 21वीं सदी में हिंदी उपन्यासों में सामाजिक मूल्यों में बदलाव देखने को मिले हैं। भूमंडलीकरण, बाजारवाद और शहरीकरण के प्रभाव से समाज में परिवर्तन हुआ और मनुष्य के जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। इस कारण लिव इन रिलेशनशिप, अंधविश्वास और रिश्वतखोरी के मामले सामने आए हैं। हिंदी विभाग की शोधार्थी कंचन बिष्ट ने बताया कि यह समाज के लिए घातक हैं।कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर की शोधार्थी कंचन बिष्ट ने बदलते सामाजिक मूल्य और इक्कीसवीं सदी के प्रमुख हिंदी उपन्यास विषय पर शोध किया। शोध प्रबंध में इक्कीसवीं सदी के प्रमुख हिंदी उपन्यासों के माध्यम से बदलते सामाजिक मूल्यों के अंतर्गत पारिवारिक, आर्थिक व धार्मिक मूल्यों को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है। 21वीं सदी ने कई मायनों में व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक मूल्यों पर काफी प्रभाव डाला है। पारिवारिक मूल्य सम्मान, प्रेम और सहयोग, परिवार की नींव रखते हैं और सदस्यों के बीच मजबूत संबंध बनाते हैं, लेकिन अब लोग एकांत में रहना अधिक पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा आर्थिक मूल्य जहां कड़ी मेहनत, ईमानदारी और बचत व्यक्तिगत और सामाजिक समृद्धि में योगदान करते हैं, वहीं रिश्वतखोरी बढ़ गई हैं। इसके अलावा धार्मिक मूल्य क्षमा, करूणा और सच्चाई, नैतिक और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देते थे, लेकिन अब अंधविश्वास की ओर लोग बढ़ रहे हैं।