नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह ने लगभग ढाई साल पहले देवनगर पट्टी सरना क्षेत्र में पत्नी और दो मासूम बेटियों को मौत के घाट उतारने के आरोपी पर हत्या का दोष सिद्ध होने के बाद आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 21 जनवरी 2019 को ग्राम देवनगर निवासी एक व्यक्ति की सूचना पर राजस्व पुलिस ने देवनगर की खड़ी पहाड़ी से तीन शव बरामद किए थे। तीनों शवों की पहचान जंगलियागांव सिमाला थाना भीमताल, जिला नैनीताल निवासी विमला देवी पत्नी चंद्रशेखर व उसकी बेटी उमा (16) व रेनू (2) के रूप में हुई। 24 जनवरी को मृतका के पिता मोतीराम निवासी हैड़ियागांव भीमताल ने पटवारी चौकी सरना में मृतका के पति चंद्रशेखर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। यह मामला रेगुलर पुलिस को सौंप दिया गया। विवेचनाधिकारी भीमताल के थानाध्यक्ष प्रमोद पाठक ने मामले की जांच कर आरोपी चंद्रशेखर को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आरोप पत्र पेश किया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह की अदालत में फैसले के लिए बुधवार का दिन नीयत किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्यों को साबित करने के लिए 15 गवाह पेश किए। शर्मा ने न्यायालय को बताया कि घटना के दिन चंद्रशेखर अपनी पत्नी और दोनों पुत्रियों के साथ देवनगर के जंगल की ओर गया था और उसे कई ग्रामीणों ने देखा था। वापसी पर वह अकेला ही गांव को लौटा था। गांव लौटने से पहले अभियुक्त ने अपनी पत्नी और दोनों पुत्रियों को खाई में धक्का देकर उनकी हत्या कर दी। गवाहों के बयान, अभियोजन पक्ष के तर्कों को सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह ने पत्नी और दो बेटियों की मौत के लिए चंद्रशेखर को दोषी ठहराया और बुधवार को उसे आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।