रामनगर (नैनीताल)। नैनीताल के तीन टोंगिया गांवों को करीब एक शताब्दी बाद राजस्व गांव का दर्जा मिल गया है। राज्यपाल की ओर से स्वीकृति देने के बाद अब इन गांवों के दिन बहुरने की उम्मीद बढ़ गई है। अभी तक भूमि का मालिकाना हक सहित कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित इन गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों को अब अन्य राजस्व गांव की तरह मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी।
ब्रिटिशकाल में वन विभाग की ओर से साल प्रजाति के पेड़ों का प्लांटेशन करने के लिए पहाड़ी क्षेत्र से कुछ लोगों को बुलाकर रामनगर के आसपास के इलाकों में बसाया गया था। यहां यह लोग एक प्लांटेशन से दूसरे प्लांटेशन तक साल के जंगल खड़ा करते रहे। बाद के दिनों में यह लोग भी वन भूमि पर ही बस गए, लेकिन इन्हें कभी राजस्व गांव का दर्जा नहीं दिया गया।
इसके चलते इन गांवों के लोग स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों के बिना जिंदगी गुजार रहे थे। साथ ही इनकी पंचायत चुनाव में भी भागीदारी करने पर रोक थी। इस कारण न इनके पास परिवार रजिस्टर होता था और न ही इनके अन्य प्रमाणपत्र बन पाते थे।
वन भूमि पर काबिज होने के कारण यह लोग कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं ले पाते थे। विकास की दौड़ में पिछड़ रहे इन टोंगिया गांवों को मुख्यधारा में लाने के लिए राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग लंबे समय से चल रही थी।
दूसरी ओर पुष्कर सिंह धामी सरकार में इन गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की प्रक्रिया तेज हुई जिसके बाद 25 अक्तूबर को प्रदेश के राज्यपाल ने रामनगर तहसील के लेटी, चोपड़ा, रामपुर गांवों को राजस्व गांव बनाने की स्वीकृति प्रदान कर दी।
क्या बोले जनप्रतिनिधि
टोंगिया गांव को राजस्व ग्राम बनाने के संबंध में मेरी ओर से सरकार से लगातार पत्राचार किया गया। सीएम पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने वर्षो पुरानी मांग को पूरा करते हुए टोंगिया ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा देते हुए शासनादेश जारी करवाया है। अब इन गांवों के लोगों को सरकारी योजनाओं के साथ मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी। -
दीवान सिंह बिष्ट, विधायक रामनगर
पिछले 76 वर्ष से इंतजार कर रहे हैं टोंगिया ग्रामवासियों के लिए यह राहत वाली खबर है और उनके संघर्षों की जीत है। उत्तराखंड में अभी भी 100 से अधिक वन भूमि पर बसे गांव ऐसे हैं जोकि राजस्व ग्राम बनाए जाने चाहिए। -
मुनीष कुमार (संयोजक) समाजवादी लोक मंच
रामनगर तहसील अंतर्गत 24 वन गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं एवं राजस्व ग्राम की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्षरत हैं। जनता की संघर्ष का ही परिणाम है कि उत्तराखंड सरकार की ओर से इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला है। -
प्रभात ध्यानी, प्रधान महासचिव उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी