हल्द्वानी।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पर्चे का शुल्क दो रुपये है। मरीजों को इलाज तो मिल रहा है, लेकिन न पर्याप्त दवा नहीं मिल रही हैं और न ही जांचें की जा रही हैं। सस्ते इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर बाजार का नुस्खा लिख रहे हैं। उन्हें 500-600 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ रहीं हैं तो वहीं निजी लैब में 2000 रुपये से अधिक की जांच कराना उनकी मजबूरी बन गया है।
हम बात कर रहे हैं दस करोड़ की लागत से बने 50 बेड के आयुष अस्पताल की। दो साल बाद भी यहां व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आई हैं। डॉक्टर पर्चे पर बाहर की दवाइयां लिख रहे हैं। करीब दो साल पहले बनाए गए शहर के एकमात्र राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पहाड़ और शहर से हर दिन 200 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।
समय - दोपहर 12:53 बजे।
पीलीकोठी निवासी पुनीत एलर्जी से परेशान हैं। दो रुपये का पर्चा बनवाकर उन्होंने आयुष अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने पर्चे पर छह दवाइयां लिखीं। इनमें मात्र दो दवाइयां ही राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय से मिलीं, बाकी चार दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ीं। बाजार में इनकी कीमत करीब 600 रुपये है।
समय - 12:58 बजे।
इंदिरानगर निवासी माहिरा पेट दर्द और एलर्जी संबंधित दिक्कत होने पर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय पहुंचीं। डॉक्टर से परामर्श लिया तो उन्हें अलग-अलग तरह की छह दवाइयां लिखी गईं। इनमें तीन दवाइयां हीं अस्पताल में मिल पाईं। बाकी दवा के लिए उन्हें भी बाजार का रुख करना पड़ा।
समय - 1:14 बजे।
कुसुमखेड़ा निवासी बसंत कुमार ने बताया कि बदन दर्द, जोड़ाें के दर्द और कब्ज की समस्या है। इसके लिए उन्हें डॉक्टर ने तीन तरह की दवाइयां और जांचें लिखी हैं जिनमें उन्हें दो दवा अस्पताल से मिली जबकि एक दवा और जांच की सुविधा अस्पताल में नहीं होने के चलते उन्हें बाहर से जांच करवाने को मजबूर होना पड़ा। सभी जांचों की कीमत 2300 रुपये है।
समय - 1:18 बजे।
इंदिरानगर निवासी आमिर हुसैन ने बताया कि उन्हें पेट दर्द और जोड़ों के दर्द की शिकायत है। इसके लिए उन्हें डॉक्टर ने चार दवाइयां लिखी हैं। इनमें मात्र एक दवा ही अस्पताल से मिल पाई है। बाकी तीन दवाइयां बाहर से लेने को कहा गया है।
लैब टेक्नीशियन स्टाफ की नहीं हो पाई नियुक्ति
हल्द्वानी। आयुष अस्पताल में अब तक लैब टैक्नीशियन स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को जांच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार, अभी तक टेक्नीशियन स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई है जिसके चलते सभी महत्वपूर्ण जांचों को बाहर से लिखा जा रहा है।
मरीजों के लिए अति आवश्यक होने पर ही जांचें और कुछ दवाई बाहर से लिखी जा रही हैं। वर्तमान में पुराने कोटे से ही दवाइयां बांटी जा रही हैं। नई दवा लैब में टेस्टिंग के लिए दी गई हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही नई दवा शुरू की जा सकेंगी। लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति के आदेश अभी तक नहीं आए हैं। आदेश आने के बाद ही नियुक्ति हो सकेगी। - डॉ. एमएस गुंज्याल, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी।