नैनीताल। 20 वर्ष से नगर के बारिश, तापमान समेत मौसम की जानकारी देने वाले जीआईसी मौसम विज्ञान केंद्र पर ही भू-स्खलन का खतरा मंडरा रहा है। नगर के संवेदनशील बलियानाला के पास शहीद मेजर राजेश अधिकारी जीआईसी परिसर में नीचे की ओर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र कभी भी भूस्खलन की जद में जमीदोंज हो सकता है।
उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड आपदा पुनर्निर्माण परियोजना के अंर्तगत भारत मौसम विज्ञान विभाग के तकनीकी सहयोग से शहीद मेजर राजेश अधिकारी राजकीय इंटर काॅलेज तल्लीताल में वर्ष 2003 में मौसम विज्ञान केंद्र की इकाई स्थापित की थी। तब से केंद्र से प्रतिदिन अधिकतम व न्यूनतम तापमान देहरादून मौसम विभाग को भेजा जाता है। बारिश के आंकड़े विभाग को दिए हैं। राज्य का मौसम विभाग सुपर कंप्यूटर की मदद से आंकड़ों का आकलन कर आगामी दिनों के मौसम का पूर्वानुमान लगाता है। बीते सालों से बलियानाला क्षेत्र में भूस्खलन के चलते अब मौसम विज्ञान केंद्र भी खतरे की जद में आ रहा है। केंद्र के ठीक नीचे कुछ ही मीटर पर पहाड़ी हर साल दरक रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी नवीन चंद्र धूसिया ने बताया कि बलियानाला में भूस्खलन के चलते राजकीय इंटर काॅलेज के साथ ही मौसम विज्ञान केंद्र को भी खतरा बना हुआ है। केंद्र को नुकसान पहुंचने पर मौसम की जानकारी जुटाना मुश्किल होगा। सुरक्षा को देखते हुए इसे अन्यत्र स्थापित करवाने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।
मैनुअल व ऑटोमेटिक उपकरण हैं यहां
नैनीताल। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी नवीन चंद्र धूसिया ने बताया कि केंद्र में तापमान को मापने के लिए मैनुअल व ऑटोमेटिक दो उपकरण लगाए गए हैं। आसमान में बादलों की गतिविधि व बारिश के आंकड़े भी यहां एकत्र किए जाते हैं। केंद्र में लगे उपकरणों की कीमत लाखों में है जिन्हें बचाना जरूरी है।
खतरे की जद में आठ मकान
भीमताल ब्लॉक की ग्राम पंचायत थापला में भी अतिवृष्टि से काफी नुकसान हुआ है। ग्राम सभा को जाने वाला मंगोली-थपला मोटर मार्ग के नाले में बहने के कारण ग्रामीण पैदल ही घर तक पहुंच रहे हैं। प्रधान नीमा नेगी ने बताया घस्यारी नाले से हो रहे कटाव के चलते आठ भवन खतरे की जद में आ गए हैं। ग्रामीणों के मकान में दरार पड़ चुकी है। मकान कभी भी गिर सकते हैं। सड़क के बहने के कारण सब्जी खेतों में ही बर्बाद रही है।
मौसम विभाग केंद्र।