हल्द्वानी। लॉक डाउन के चलते मेडिकल स्टोर पर दवाओं का जल्द ही संकट हो सकता है। लॉक डाउन की वजह से शुगर, बीपी जैसी बीमारियों की दवा की बिक्री खूब हुई। उधर ट्रांसपोर्ट बन्द होने से नई दवाओं की खेप नहीं हो पा रही है। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के तुरन्त बाद से जारी किया गया लॉक डाउन की वजह से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हुई है। ट्रांसपोर्ट सेवा भी बंद होने से दवाओं की आपूर्ति भी रुकी हुई है। इधर 22 मार्च के बाद से हर तरफ 3 माह तक के लिए लॉक डाउन की अफवाह है इस अफवाह की वजह से लोगों ने ब्लड प्रेशर, डाइबटीज, गठिया, अस्थमा, मानसिक रोग, प्रोस्टेट रोग में काम आने वाली दवाओं की खरीद बड़े पैमाने पर कर ली। अमूमन दुकानदारों के पास इन दवाओं के लिए 1 माह तक का स्टॉक होता है। रूटीन में इन दवाओं की पूर्ति होती रहती है। अब शहर में थोक विक्रेता हो या फुटकर विक्रेता सभी के पास ज्यादा से ज्यादा 15 दिन का ही स्टॉक बचा है और ट्रांसपोर्ट सेवा बन्द होने से दवाओं का स्टॉक नहीं आ पा रहा है।
दवाओं के आर्डर लॉक डाउन के चलते फंसे हल्द्वानी। हल्द्वानी में दवाओं की आपूर्ति रुड़की, गाजियाबाद, अलीगढ़, देहरादून आदि शहरों से होती है। दवा विक्रेताओं के 19 मार्च तक के ऑर्डर फंसे हुए हैं। 22 मार्च से यहां दवाओं की डिलिवरी बन्द है। लोग पुराने स्टॉक से काम चला रहे हैं। हल्द्वानी कुमाऊँ में दवाओं के थोक व्यापार का भी केंद्र है। यहां से पहाड़ को दवाओं की सप्लाई होती है। रविवार को यहां से पहाड़ के लिए प्रशासन से प्रमिशन लेकर दवाओं की खेप भेजी गई है लेकिन मांग को देखते हुये ये नाकाफ़ी है। अनुमान है कि लॉक डाउन की वजह से हल्द्वानी से पहाड़ को होने वाले व्यापार पिछले सात दिनों में 5 करोड़ का नुकसान हुआ है।
सेनेटाइजर, मास्क की भी कमी
हल्द्वानी। सेनेटाइजर और मास्क की भी कमी होती जा रही है। सेनेटाइजर तो कम्पनी में ऊपर से ही शार्ट चलने की खबर है। इसी तरह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली विटामिन सी टेबलेट का कई दुकानों पर स्टॉक खत्म हो गया है। पिछले 10 दिनों में इस दवा की जमकर बिक्री हुई है। इसी तरह थोक विक्रेताओं के पास डिटॉल, सेवलोंन जैसे प्रोडक्ट की भी कमी हो रही है।
दवाओं की आपूर्ति न होने से जरूरी दवाओं की कमी होने लगी है। ट्रांसपोर्ट सेवा बन्द होने से दवा विक्रेताओं को काफी नुकसान हो रहा है।
- रमेश चन्द्र भट्ट, दवाओं के थोक व्यापारी