हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से कराए गए मूल्यांकन में इस बार कई त्रुटियां पाई गई थी। इससे बचने के लिए अब विवि ने नया नियम बनाया है। भविष्य में मूल्यांकन के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की जांच सीनियर टीचिंग और नॉनटीचिंग स्टाफ से कराई जाएगी।
आरटीआई लगाने के बाद कुमाऊं विवि से मिली उत्तरपुस्तिका की प्रतिलिपि में पाया गया था कि कॉपी के अंदर अलग, बाहर अलग नंबर और परीक्षाफल में अलग नंबर चढ़े हैं। कई प्रश्नों को बिना जांचें और बिना नंबर दिए ही छोड़ दियाथा। छात्र-छात्राओं के रिजल्ट में कहीं ज्यादा तो कहीं कम नंबर चढ़े थे। इसको लेकर छात्रों ने नाराजगी जताते हुए आंदोलन भी किया था। अमर उजाला ने भी इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। फजीहत के बाद कुमाऊं विवि मूल्यांकन में होने वाली गड़बड़ियों को दूर करने के लिए नई व्यवस्था बनाने जा रहा है।
भविष्य में सभी मूल्यांकन केंद्रों में उत्तरपुस्तिका की दोबारा जांच के लिए वरिष्ठ प्राध्यापक, रिटायर्ट प्राध्यापक या शिक्षणेतर कार्मिक नियुक्त किए जाएंगे। ये कार्मिक उत्तरपुस्तिका में जांच करेंगे कि भीतर चढ़े नंबरों का योग और बाहर लिखे नंबरों का योग एकसमान है या नहीं। जांच में कमी मिलने पर मूल्यांकनकर्ता को बता दिया जाएगा कि उन्होंने क्या गड़बड़ी की है। प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र में उत्तरपुस्तिकाओं के औसत के आधार पर कार्मिकों को दायित्व सौंपा जाएगा। संवाद
कोट
मूल्यांकन केंद्रों में उत्तरपुस्तिका की दोबारा जांच के लिए वरिष्ठ या सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और शिक्षणेतर कार्मिकों को दायित्व सौंपा जाएगा। इससे भविष्य में मूल्यांकन में त्रुटियों की संभावना कम हो जाएगी। मानवीय गलतियां भी दूर होंगी। अगली परीक्षाओं से इस नियम को लागू किया जाएगा।
-डॉ. महेंद्र राणा, परीक्षा नियंत्रक, कुमाऊं विवि