फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोसी नदी में आई बाढ़, मंदिर कपाट बंद

विज्ञापन
रामनगर में बारिश के चलते गर्जिया मंदिर परिसर को तिरपाल से ढका गया। संवाद - फोटो : RAMNAGAR
विज्ञापन
रामनगर (नैनीताल)। चार दिनों से लगातार हो रही बारिश की वजह से कोसी नदी में बाढ़ आ गई। कोसी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गर्जिया मंदिर के कपाट को बंद कर दिया गया है। बाढ़ से गर्जिया मंदिर की तीन सीढ़ियां भी बह गई हैं। स्थिति को देखते हुए गर्जिया मंदिर के पुल पर भी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
विज्ञापन

पिछले साल 19 अक्तूबर को आई बाढ़ से गर्जिया मंदिर का स्वरूप बदल गया था और 30 साल बाद कोसी नदी ने रुख बदल दिया था। वर्तमान में कोसी दो धाराओं में बंटकर बह रही है। बीते वर्ष भी बाढ़ से गर्जिया मंदिर के परिसर को काफी नुकसान पहुंचा था। तब भी मंदिर की सीढ़ियां बह गईं थीं। बाढ़ की वजह से डेढ़ महीने तक मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया था। इस बार भी मंदिर की तीन सीढ़ियां बह गई हैं। मंदिर परिसर के पास लगी प्रसाद की दुकान पानी में डूब गई है। नदी में पानी का बहाव काफी तेज है।
गर्जिया मंदिर के पुजारी मनोज चंद्र पांडेय ने बताया कि कोसी नदी का बहाव जब तक कम नहीं होता तब तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। इससे पहले कोरोना काल में मंदिर को बंद किया गया था।
विज्ञापन

नवरात्र में थी गर्जिया में काफी भीड़
इस बार नवरात्र में गर्जिया मंदिर में श्रद्धालुुओं की काफी भीड़ थी। रामनगर, काशीपुर, मुरादाबाद, संभल, हल्द्वानी, रामपुर आदि शहरों से लोग गर्जिया माता के दर्शनों के लिए आए थे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया था।
पर्यटक भी करते हैं मंदिर में दर्शन
15 अक्तूबर को कॉर्बेट पार्क का बिजरानी जोन खुल जाता है। कॉर्बेट पार्क घूमने वाले पर्यटक भी गर्जिया मंदिर के दर्शनों के लिए आते हैं। पर्यटकों की आमद से गर्जिया मंदिर गुलजार रहता है। दिवाली के दौरान भी पर्यटक गर्जिया के दर्शन करने आते हैं। एसडीएम गौरव चटवाल ने बताया कि मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया है।
बचाव के लिए तिरपाल से ढका गर्जिया मंदिर
गर्जिया मंदिर के टीले पर दरार पड़ी है। दरारों को ठीक करने के लिए सिंचाई विभाग ने डीपीआर शासन को भेजी है। दरारें और चौड़ी हो गई हैं। बारिश से बचाने के लिए मंदिरों को चारो ओर से तिरपाल से ढका गया है ताकि बारिश का पानी दरारों में नहीं जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें