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कोजागरी पूर्णमासी आज, 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा के होंगे दर्शन

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हल्द्वानी। कोजागरी पूर्णिमा रविवार नौ अक्तूबर को मनाई जाएगी। आश्विन मास की पूर्णिमा विशेष महत्व रखती है। सनातन धर्म में इस पूर्णिमा को कोजागरी (छोटी दीपावली) के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन से कार्तिक स्नान भी शुरू हो जाएंगे। इसी दिन भगवान वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाती है।
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कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर धरती पर अपनी किरणों से अमृत की वर्षा करते हैं। इस दिन चंद्रमा में अमृत का संचरण होता है। ज्योतिष अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि इसइस रात चंद्रमा के साथ माता महालक्ष्मी का भी पूजन कर खीर को चंद्रमा की शीतल रोशनी में किसी छलनी या बारीक सूती कपड़े से ढक कर रखना चाहिए। रात में चंद्रमा की किरणों से युक्त खीर को अगले दिन सुबह माता लक्ष्मी को भोग लगाने के प्रसाद रूप में बांटा जाता है।
माना जाता है कि इससे अमरत्व की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा की रात को जो भक्त रात्रि जागरण करते हुए माता महालक्ष्मी की श्रद्धा के साथ पूजा कर माता लक्ष्मी को दीपावली पर आने का निमंत्रण देता है, पूरे वर्ष उस पर महालक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि नौ अक्तूबर की सुबह 3.41 बजे से शुरू होगी और 10 अक्तूबर दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इस दौरान सूर्योदय से लेकर सायंकाल 4.20 तक सर्वार्थसिद्धि योग बना रहेगा।
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पूजा विधि-
प्रात:काल गंगा जल मिश्रित जल से स्नान कर अपने घर के मंदिर में चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी का चित्र रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना करें। सात्विक खाद्य पदार्थों का व्रत में सेवन करें और शाम को चंद्रमा के साथ माता महालक्ष्मी, विष्णु का श्रद्धानुसार पूजन कर और खीर रखकर आरती करें। रात को खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखें।
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