काठगोदाम रेलवे स्टेशन के स्वागत द्वार के पास लोहे के कबाड़ से तैयार किए गए आकर्षक स्टेच्यू।
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कुमाऊं के प्रवेश द्वार काठगोदाम रेलवे स्टेशन की तस्वीर अब बदलने लगी है। कभी ब्रिटिशकालीन दौर के कुमाऊं टाइगर इंजन की वजह से यात्रियों के आकर्षण का केंद्र रहने वाला यह स्टेशन अब कबाड़ के लोहे से गढ़ी कलाकृतियों से अपनी नई पहचान बनाएगा। भारतीय रेलवे की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशन संवारा जा रहा है। इसके लिए स्टेशन के प्रवेश द्वार के पास लोहे के स्क्रैप से तैयार नाव के साथ खड़े नाविक और सैनिकों की आकर्षक प्रतिमा स्थापित हो गई हैं।
काठगोदाम स्टेशन पर वर्षों से नजर आने वाले कुमाऊं टाइगर इंजन को स्टेशन परिसर से हटाकर हाईवे किनारे रेलवे की भूमि पर शिफ्ट कर दिया। अब उसी जगह और स्टेशन परिसर की नई सजावट में कला का एक अलग रंग नजर आ रहा है। स्टेशन के प्रवेश द्वार के पास आकर्षक प्रतिमाएं यात्रियों का आकर्षण बनी हुई हैं।
इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इन्हें चमचमाती नई धातु से नहीं बल्कि रेलवे के जर्जर लोहे और कबाड़ से तैयार किया गया है। पुरानी लोहे की चादरें, नट-बोल्ट और दूसरे अनुपयोगी धातु के सामान को कलाकारों ने आकार देकर आकर्षक प्रतिमाओं में बदल दिया। रेलवे स्टॉफ के अनुसार प्रतिमाओं के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया गया था। तैयार होने के बाद इन्हें अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशन के आसपास अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया जा रहा है।
स्टेशन पर दिखेगा पहाड़ और पराक्रम
नाव और नाविक की प्रतिमा काठगोदाम के उस भूगोल की ओर भी संकेत करती है, जहां से पहाड़ों की यात्रा शुरू होती है। सैनिकों की प्रतिमाएं उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और वीरभूमि की पहचान को सामने रखेंगी। स्टेशन परिसर में बृहस्पतिवार की दोपहर ट्राले से पहुंची विशालकाय प्रतिमा उतारी भी नहीं गई थी कि लोग सेल्फी लेने लगे। रेलवे इज्जतनगर के पीआरओ ने बताया कि अमृत भारत से विकसित हो रहे स्टेशनों के लिए इस तरह की कलाकृतियां तैयार की गई हैं।
इस्केलेटर का काम नहीं हुआ पूरा
अमृत भारत स्टेशन के तहत काठगोदाम में लंबे समय से काम चल रहा है। रेलवे सूत्रों के अनुसार यात्रियों की जरूरत इस्केलेटर अभी तैयार नहीं हो पाया है। लोगों को सीढि़यां चढ़कर प्लेटफार्म में पहुंचना पड़ रहा है।