पिथौरागढ़। इस बार गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर वरिष्ठ रंगकर्मी जनकवि जनार्दन उप्रेती (जन्नू दा) के गीत ‘जै हो कुमाऊं, जै हो गढ़वाल’ की भी गूंज सुनाई दी। इस गीत को उत्तराखंड की मानसखंड झांकी में शामिल किया गया। जन्नू दा के इस गीत को आठ लोगों ने स्वर दिया है। चांदनी इंटरप्राइजेज की ओर से इसे तीन-चार हफ्ते पहले ही रिलीज किया गया है।
हुड़ेती गांव निवासी जनार्दन उप्रेती (जन्नू दा) 250 से अधिक गीतों की रचना कर चुके हैं। रविवार को हुड़ेती गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ जन्नू दा का स्वागत किया गया। उनके सम्मान में गांव के सांस्कृतिक मंच तक रैली निकाली गई। वक्ताओं ने उप्रेती के प्रयासों की सराहना कर इसे पिथौरागढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
शिक्षाविद डॉ. अशोक पंत ने कहा कि उप्रेती के गीतों में प्रसिद्ध जनकवि गिर्दा के गीतों की झलक देखती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन यह उत्तराखंड का जनगीत बनेगा।
उक्रांद के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, समाजसेवी जुगल किशोर पांडेय, शिवराज सिंह अधिकारी, कैप्टन दीवान सिंह वल्दिया, महेश पुनेठा, शिवराज सिंह अधिकारी, यशवंत महर आदि ने भी विचार रखे। चिंतामणि जोशी, भुवन उप्रेती, प्रदीप उप्रेती ने संचालन किया।
जन्नू दा ने इस गीत के लिए चांदनी इंटरप्राइजेज के नवीन टोलिया और भैरव राय का आभार जताया। इस दौरान प्रो. जीत सिंह ज्याला, हेमराज बिष्ट, शमशेर महर, प्रकाश जोशी, कैलाश उप्रेती, जगत मेहता, गोविंद बिष्ट, मुकेश पंत, हयात तड़ागी, भूपेंद्र बिष्ट, भूपेंद्र महरा, डॉ. दीप चौधरी आदि मौजूद रहे।
गीत के बोल.. जै हो कुमाऊं, जै हो गढ़वाल..धारा नौला छन, गंगा छू गाड़ा, कतू भल लागू म्यर पहाड़ा..।