पांच दशक का इंतजार अब खत्म होने की ओर है। हल्द्वानी की प्यास बुझाने और तराई के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने वाला जमरानी बांध अब धरातल पर आकार लेने लगा है। गौला नदी पर काठगोदाम से करीब 10 किलोमीटर ऊपर बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की इंजीनियरिंग भी खास है।
नदी तल से 30 मीटर नीचे तक नींव की खोदाई और 150 मीटर चौड़े आधार पर बनने वाला यह कंक्रीट ग्रेविटी बांध पांच विशाल गेटों से बाढ़ के पानी को नियंत्रित करेगा। परियोजना पूरी होने पर हल्द्वानी को वर्ष 2055 तक पेयजल उपलब्ध कराने के साथ हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है।
परियोजना के उप महाप्रबंधक बीबी पांडेय ने बताया कि बांध की कुल ऊंचाई समुद्र तल से 762 मीटर होगी। इसमें 706 मीटर के लेवल पर 8x10 मीटर के पांच विशालकाय गेट लगेंगे जिनसे बाढ़ के पानी को कंट्रोल किया जाएगा। गेट के साथ ही 4 x 4 मीटर का स्लिपवे भी बनाया जाएगा। सबसे खास बात है कि 56 मीटर नीचे हेड से पानी छोड़ा जाएगा ताकि प्रेशर से सप्लाई मैनेज हो।
बांध की नींव की खोदाई नदी के तल से 30 मीटर नीचे तक होगी और नींव की चौड़ाई 150 मीटर रखी गई है। विभाग ने पहाड़ियों का कटान कर 30 मीटर कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी है। मुख्य बांध की बुनियाद इस साल की आखिरी तिमाही में शुरू होगी। नदी का रुख मोड़ने के लिए दो डायवर्जन टनल बनाई गई हैं, मानसून के बाद गौला इन्हीं टनलों से गुजरेगी और मुख्य स्थल सूखा रहेगा।
150.6 मीटर ऊंचा ये कंक्रीट ग्रेविटी बांध 10 किमी लंबी झील बनाएगा। लागत 3808 करोड़ जिसमें केंद्र 90 फीसदी दे रहा है। पीएम कृषि सिंचाई योजना में शामिल है।
फायदा: हल्द्वानी शहर को 2055 तक हर साल 42.70 एमसीएम पेयजल मिलेगा। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर और यूपी के बरेली-रामपुर के 57,066 हेक्टेयर खेतों को अतिरिक्त सिंचाई होगी। निर्माण एजेंसी को 2029 तक का टारगेट दिया गया है। बांध से भीमताल ब्लॉक के छह गांव प्रभावित होंगे। इन्हें ऊधमसिंह नगर के प्राग फार्म में विस्थापित किया जा रहा है।