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Nainital News: सुविधाओं के लिए आईएसबीटी का इंतजार

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हल्द्वानी। हल्द्वानी में रोडवेज स्टेशन, केमू और टैक्सी स्टैंड में यात्रियों की सुविधाओं का टोटा है। हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन के जर्जर भवन में यात्रियों को सुविधा दी जा रही है तो वहीं टैक्सी और केमू स्टैंड में यह सुविधा नहीं है। लोगों को आईएसबीटी का इंतजार है। आईएसबीटी परियोजना में तय किया गया था कि टैक्सी स्टैंड, केमू और रोडवेज स्टेशन को एक ही छत के नीचे बनाया जाए।
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हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार है। यहां से कुमाऊं के सभी स्थानों के लिए बसें और टैक्सियां मिलती हैं। हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन का भवन पुराना हो चुका है। बारिश के दिनों में यहां छत टपकती रहती है। यात्रियों बैठने के लिए व्यवस्था की गई है लेकिन भीड़ होने पर यह व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो जाती है। रोडवेज स्टेशन की सबसे बड़ी दिक्कत उसका छोटा होना है। समय के साथ हल्द्वानी बस अड्डे पर यात्रियों की भीड़ बढ़ी लेकिन रोडवेज स्टेशन का विस्तार नहीं हो पाया। जिस वजह से यात्रियों को यहां असुविधाओं के साथ बसों का इंतजार करना पड़ता है। इधर, केमू स्टैंड में कहीं भी यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं है। केमू के पुराने भवन में कार्यालय संचालित होता है। सड़क पर खड़े होकर ही लोगों को बसों का इंतजार करना पड़ता है। केमू के यात्रियों के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है। भोटिया पड़ाव स्थित टैक्सी स्टैंड का भी यही हाल है। टैक्सी स्टैंड संचालकों के लिए तो भवन बन गया है लेकिन यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। लालडांठ चौराहे के पास बाजपुर बस अड्डे का भी यह हाल है। एक खाली मैदान में बस अड्डा संचालित किया जा रहा है। बारिश के दिनों में मैदान में पानी भर जाता है।
आईएसबीटी बने तो दूर होगी समस्या
इन समस्याओं को देखते हुए शहर में साल 2016 में आईएसबीटी बनाने की शुरुआत हुई थी। गौलापार में आठ हेक्टेयर जमीन की मंजूरी आईएसबीटी के लिए मिल गई। 75 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत हो गया। जून 2017 में इस जगह पर नर कंकाल मिलने पर काम रुकवा दिया गया। गौलापार में प्रोजेक्ट को रद्द करके जमीन वन विभाग को वापस कर दी गई। हालांकि पुरातत्व विभाग यहां पर कब्रिस्तान होने की बात से इंकार कर चुका था। बाद में तीनपानी में आईएसबीटी बनाने की बात उठी। आईएसबीटी के अंदर ही टैक्सी स्टैंड और केमू बस अड्डा समायोजित करने की योजना थी। बाजपुर बस अड्डे को भी इसमें समायोजित करना था। फिलहाल राज्य सरकार का कहना है कि अगर कहीं जमीन का मसला नहीं सुलझा तो काठगोदाम बस अड्डे को ही आईएसबीटी के तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लोगों का मानना है कि वहां आईएसबीटी बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
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यात्री बोले, हमें दो सुविधाएं
रोडवेज स्टेशन पर सुधार की जरूरत है। खासतौर से सफाई व्यवस्था पर जोर देना होगा। यात्रियों के बैठने के लिए अभी और सुविधाएं किए जाने की जरूरत है।
-हेम कांडपाल
रात के समय जो बसें आतीं हैं, उन यात्रियों के रुकने लिए सुविधा की जाए। नया आईएसबीटी भी जल्द से जल्द बनाया जाए।
-आनंद सिंह
कोट
नया आईएसबीटी बनाने के लिए सरकार प्रयासरत है। जमीन का मसला सुलझ जाने के बाद इसे बनाया जाएगा।
-चंदन रामदास, परिवहन मंत्री, उत्तराखंड
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