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मानसिक दिव्यांग विद्यालय से किशोर कैसे लापता हुआ जांच कर बताएं: हाईकोर्ट

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नैनीताल हाईकोर्ट।
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने मानसिक दिव्यांग बच्चों के आवासीय विद्यालय में 14 वर्षीय किशोर के लापता होने और बालकों के उत्पीड़न के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने नैनीताल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार न्यायिक के साथ ही याचिकाकर्ता के अधिवक्ता व सरकारी अधिवक्ता की टीम गठित करने के निर्देश दिए है। कहा है कि शुक्रवार को ही रामनगर जाकर स्कूल की जांच करने व शाम तक रिपोर्ट दाखिल करें।
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कोतवाल रामनगर को निर्देश दिए हैं कि वह नियुक्त टीम को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएं। कोर्ट ने शुक्रवार को एसएसपी नैनीताल व कोतवाल रामनगर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हुई।
दिव्यांग बच्चों के लिए काम करने वाली रोशनी सोसायटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि रामनगर में यूएसआर इंदु समिति का मानसिक दिव्यांग बच्चों का आवासीय विद्यालय है। यहां लंबे समय से बच्चों का उत्पीड़न किया जा रहा है। पुलिस से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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12 अगस्त को संस्थान से एक किशोर लापता हो गया था। इसकी रिपोर्ट बाल विकास समिति ने कोतवाली पुलिस को दी लेकिन पुलिस ने हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर खानापूरी कर दी। 14 वर्षीय किशोर की तलाश तक नहीं की गई। लापता होने के 25 दिन बाद पुलिस ने नौ सितंबर को रिपोर्ट दर्ज की।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के बच्चों के कल्याण से संबंधित आदेशों का खुला उल्लंघन किया गया। पुलिस ने किसी भी स्तर पर अपनी ड्यूटी नहीं की। किशोर आज भी लापता है। पुलिस ने किशोर के गायब की जानकारी तक नेट पर जारी नहीं की है।
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