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बेघर हो रही होम स्टे योजना

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मूकेश, होम स्टे संचालक। विज्ञप्ति - फोटो : HALDWANI
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हल्द्वानी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी होम स्टे योजना के प्रति लोगों का रुझान कम होता जा रहा है। तीन साल पहले प्रदेश भर में 1262 लोगों ने योजना का लाभ लिया था जो अब बढ़ने के बजाय घटकर 857 रह गया है।
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होम स्टे योजना पहाड़ों में पलायन को रोकने के लिए शुरू की गई थी। योजना का मूल उद्देश्य पर्यटकों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में रहने के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद योजना के लाभार्थियों में कमी आ रही है। देहरादून, चमोली, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर जिलों में इस योजना के लिए आवेदन करने वालों में कमी आई है।
देहरादून जिले में जहां साल 2018 में 211 ने लोगों ने इस योजना के लिए आवेदन किया था तो वहीं अब केवल 71 लोगों ने ही इसके लिए आवेदन किया है। इसी तरह नैनीताल जिले में चार साल पहले जहां 149 लोगों ने आवेदन किया था तो वहीं इस साल 114 लोग ही इस योजना के लिए आगे आए।
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ऊधमसिंह नगर जिले में पिछले दो साल में इस योजना का लाभ लेने के लिए कोई नहीं पहुंचा है। संचालकों का कहना है कि योजना का पर्याप्त प्रचार-प्रसार न होने और सब्सिडी मिलने के प्रक्रिया जटिल होने की वजह से ग्रामीणों का रुझान कम हो रहा है। संवाद
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होम स्टे पंजीकरण योजना का वर्षवार विवरण
जिला 2018-19 2019-20 2020-21 2021-22
देहरादून 211 220 112 71
हरिद्वार 13 5 6 10
टिहरी 95 51 42 50
उत्तरकाशी 60 195 107 217
रुद्रप्रयाग 57 69 38 46
पौड़ी 19 76 16 67
चमोली 125 195 96 44
नैनीताल 149 127 128 114
अल्मोड़ा 59 85 37 117
पिथौरागढ़ 141 177 193 70
चंपावत 5 29 62 36
ऊधम सिंह नगर 2 6 00 00
बागेश्वर 29 27 43 15
योग 965 1262 880 857
(स्रोत - पर्यटन विभाग उत्तराखंड)
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इस साल फिर से होम स्टे योजना के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बढ़ रही है। पिछले दो साल में इसमें कमी देखने को आई है। उस दौरान कोरोना भी चल रहा था।
- पूजा चंद, अतिरिक्त निदेशक, पर्यटन विभाग, उत्तराखंड।
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सरकार होम स्टे योजना को लेकर जितनी मदद करने का दावा करती है, हकीकत में उतना नहीं है। कोविड की वजह से काम प्रभावित होने पर सरकार की ओर से छह हजार रुपये मदद के नाम पर खानापूर्ति के दिए गए हैं। सब्सिडी वाला ऋण कहने-सुनने में अच्छा लगता है। जब आदमी इसको लेने जाता है तब पता चलता है कि ये दूरी की कौड़ी है।
- मुकेश, होम स्टे संचालक।
होम स्टे योजना की ज्यादा से ज्यादा मार्केटिंग करने की जरूरत है। महानगर के लोग कुछ दिन गांवों में ठहरना चाहते हैं लेकिन अभी भी इस योजना का व्यापक तौर पर प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया है। होम स्टे संचालन से बस केवल थोड़ा खर्चा निकल रहा है। अभी ऐसा नहीं लगता कि ये योजना पलायन रोकने में ज्यादा कारगर साबित रहेगी।
- मोहन पांडे, होम स्टे संचालक।
50 फीसदी सब्सिडी के बाद भी रुझान हुआ कम
हल्द्वानी। होम स्टे योजना नगर निगम क्षेत्र में लागू नहीं होती है। पर्यटन विभाग तीस लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाता है। ऋण पर 50 फीसदी तक सब्सिडी भी दी जाती है। बैंक ब्याज पर 50 प्रतिशत और अधिकतम 1.50 लाख रुपये पर्यटन विभाग जमा करता है।

मोहन चन्द्र पाण्डेय, होम स्टे संचालक। विज्ञप्ति- फोटो : HALDWANI

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