नैनीताल। हाईकोर्ट ने मंगलवार को नंधौर ईको सेंसटिव वन क्षेत्र में राज्य सरकार की ओर से बाढ़ राहत योजना के तहत खनन की अनुमति देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने बाढ़ राहत कार्य के तहत नदी से निकलने वाले रेता, बजरी के दोहन पर लगी रोक को आगे बढ़ा दिया है। सरकार से चार हफ्ते में जवाब पेश करने के लिए कहा है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हुई।
चोरगलिया निवासी दिनेश कुमार चंदोला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। कहा कि हल्द्वानी का नंधौर क्षेत्र ईको सेंसटिव जोन में आता है। इस क्षेत्र में सरकार ने बाढ़ से बचाव कार्यक्रम के नाम पर खनन करने की अनुमति दे दी है। इसका फायदा उठाते हुए खनन कंपनी मानकों के विपरीत खनन कर रही हैं। याचिका में कहा गया कि एकत्र निर्माण सामग्री को क्रशर ले जाई जा रही है, जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ईको सेंसटिव जोन में खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, ईको सेंसटिव जोन की नियमावली के विरुद्ध है। याचिकाकर्ता ने इसपर रोक लगाने की मांग की है।