जो काम तहसीलदार, एसडीएम और डीएम को करना चाहिए था उस काम को कमिश्नर कर रहे हैं। असल में प्रशासनिक अधिकारियों को अपने कार्यालय से बाहर निकलने की फुर्सत नहीं होती। जिसका फायदा पटवारी और अमीन उठते रहते हैं। बिना किसी कारणों के कामों को लटकाया जाता है। कमिश्नर ने मंगलवार को पहुंचकर पेंच कसे। अब देखना ये होगा कि उनकी इस कारवाई का असर कितना होगा। यदि समय समय पर अधिकारी तहसील के काम की मॉनिटरिंग करें तो कमिश्नर को आने की जरूरत नहीं होगी।