नैनीताल। हाईकोर्ट ने जिला जज देहरादून व सीबीआई देहरादून से पूछा है कि मुजफ्फरनगर कांड से संबंधित केसों को कैसे व किस आधार पर मुजफ्फरनगर ट्रांसफर कर दिया गया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से भी यह बताने को कहा है कि केस ट्रांसफर क्यों नहीं हो सकते हैं। दोनों पक्षों को नौ जनवरी तक इस मामले में जवाब देने को कहा है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष हाईकोर्ट के अधिवक्ता व राज्य आंदोलनकारी रमन कुमार साह की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि राज्य आंदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर कांड में पुलिस की ज्यादती व गोलीबारी में 22 आंदोलनकारियों की मौत हुई। इस कांड से संबंधित मुकदमों में से तीन का केस देहरादून से मुजफ्फरनगर ट्रांसफर करने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन केसों में तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह भी आरोपित थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो मामलों को ट्रांसफर करने की याचिका स्वीकार हुई जबकि जिसमें अनंत कुमार सिंह आरोपित थे, उस याचिका को खारिज कर दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के विरुद्ध सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की जबकि दो केसों से संबंधित याचिकाएं सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर जिला जज देहरादून की ओर से बताया गया है कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के अनुरोध पर छह केस मुजफ्फरनगर भेजे गए। प्रशासनिक आदेश पर केसों को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने इस कांड के आरोपितों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा चलाने की प्रार्थना की है।