नैनीताल। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ ने बुधवार को उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। पीठ ने मामले को दूसरी खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली की ओर से फरवरी 2023 के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की नैनीताल पीठ के एक आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। इसमें कैट ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स को भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया था। इन मामलों की जांच पूर्व में चतुर्वेदी ने संस्थान के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पद पर रहते हुए की थी। चतुर्वेदी के पद से हटने के बाद जांच बंद कर दी गई थी।
जून 2012 से अगस्त 2014 तक सीवीओ के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, चतुर्वेदी ने एम्स के वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों से जुड़े भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच की थी। बाद में पद से हटने के बाद, उन्हें वित्तीय वर्ष 2015-16 में वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट में उन्हें शून्य ग्रेडिंग दी गई थी जिस पर उन्होंने जुलाई 2017 में कैट की नैनीताल बेंच के समक्ष आपत्ति दर्ज की थी। इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स दिल्ली को नोटिस जारी किया गया था। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया था कि उनकी मूल्यांकन रिपोर्ट में भ्रष्टाचार उजागर करने पर प्रतिशोधी कार्रवाई के रूप में शून्य ग्रेड दिया गया था।
कैट के आदेश के को रद्द करने व अमल पर रोक लगाने के लिए एम्स ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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पूर्व में भी कई बेंच कर चुकी हैं खुद को सुनवाई से अलग
नैनीताल। संजीव चतुर्वेदी के विभिन्न मामलों में पूर्व में भी अनेक बेंच खुद को विभिन्न कारणों से सुनवाई से अलग कर चुकी हैं।
चतुर्वेदी ने बताया कि यह छठा अवसर है जब न्यायाधीशों ने उनके मामले से खुद को अलग किया है। नवंबर 2013 में, सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री की भूमिका की सीबीआई जांच के संबंध में उनकी ओर से दायर एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। बाद में अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज यूयू ललित ने भी इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
अप्रैल 2018 में, शिमला अदालत के एक न्यायाधीश ने संजीव चतुर्वेदी के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव की ओर से दायर मानहानि के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। मार्च 2019 में कैट दिल्ली के अध्यक्ष, ने और फरवरी 2021 में कैट दिल्ली के एक अन्य न्यायाधीश ने भी संजीव चतुर्वेदी के एक सेवा मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।