महाशिवरात्रि पर्व पर सभी मंदिरों और शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पूजा अर्चना और आरती के बाद प्रसाद बांटा। शिव मंदिरों में बम भोले के बोल गूंज रहे थे। मंदिरों में भांग-धतूरे का भी भोग लगाया गया। क्षेत्र के कालीचौड़, कालूसाई, पिपलेश्वर, पंचेश्वर, नंदेश्वर, बृज विहार, बेलबाबा, सत्यनारायण मंदिर, सिद्धेश्वर, शीतलाहाट, लटूरिया बाबा, नवाबी रोड, शीशमहल, दमुवाढूंगा के शिव मंदिरों में चहल-पहल रही। सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय में पार्थिव पूजन किया गया। इस अवसर पर कई जगह भंडारा भी लगा।
मुखानी स्थित शिवमंदिर और गौलापार स्थित बसंतपुर काली मंदिर में कांवड़ियों द्वारा हरिद्वार से लाए गए गंगाजल से जलाभिषेक किया गया। पिपलेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक के साथ चार प्रहर की पूजा विधिवत संपन्न हुई। समन्वय सेवा कुंज की ओर से पर्वतेश्वर महादेव मंदिर में प्रात: रुद्राभिषेक के बाद ब्राह्मणों ने मृत्युंजय जाप किया। रात के चारों प्रहरों में रुद्रीपाठ किया गया। वहीं, कालीचौड़ समेत कई मंदिरों में ठंडई (भांग घोटा) भी बनाई गई थी।
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बेलबाबा मंदिर में लगी दो किमी लाइन
रामपुर रोड स्थित बेलबाबा मंदिर में पुलिस को लाइन लगवाकर शिव भक्तों को मंदिर में प्रवेश कराना पड़ा। यहां पुलिस और डाग स्क्वायड से भी विशेष सुरक्षा रही। महंत बाला गिरि के निर्देशन में अध्यक्ष ईश्वरी दत्त सुयाल, मोहन सिंह फर्त्याल, देवेंद्र सिंह, कृष्ण चंद्र जोशी, गोपाल पांडे, सतनाम सिंह, प्रधान मोहन नेगी, कृपाल सिंह रजवार, ललित मोहन भट्ट आदि व्यवस्थाओं में लगे रहे। इस मौके पर दो कुंतल दूध की खीर का प्रसाद भी बांटा गया।
बेल पत्री से हुआ विशेष पूजन
शिवालयों में बेलपत्री से भगवान शिव का पूजन किया गया। अधिकांश लोग बेलपत्री और गंगाजल लेकर पूजा अर्चना करने गए थे। बेलपत्री के भगवान शिव के पूजन पर विशेष महत्व बताया जाता है। वहीं उत्तराखंड बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं ने महाशिवरात्रि पर शिवालयों में श्रद्धा से साथ पूजा अर्चना की।