हल्द्वानी उप निदेशक रेशम निदेशालय में रेशम से राखियां तैयार करती महिलाएं।
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रक्षाबंधन के पावन पर्व को देखते हुए हल्द्वानी में महिला सशक्तिकरण की एक बेहद खूबसूरत और अनोखी तस्वीर सामने आई है। उपनिदेशक रेशम कुमाऊं मण्डल की अनूठी पहल पर क्षेत्र के दो महिला स्वयं सहायता समूहों ने रेशम के कोयों (कोकून) से बेहद आकर्षक राखियां तैयार की हैं। पिछले एक महीने से रेशम निदेशालय में आकर महिलाएं दिन-रात इन सुंदर राखियों का निर्माण कर रही हैं। इन राखियों की चमक अब सात समंदर पार तक पहुंच चुकी है, जहां पहली खेप के रूप में 75 राखियां दुबई भेजी गई हैं।
रेशम कुमाऊँ मण्डल के इस प्रयास से ''रेशम एक नई पहल स्वयं सहायता समूह'' और ''लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह'' से जुड़ी महिलाओं को रोजगार का एक बेहतरीन जरिया मिला है। लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह की अध्यक्षा रेखा रानी ने बताया कि वे रेशम के कोया (कोकून) से सुंदर और रंग-बिरंगी राखियां बना रही हैं। महिलाओं की इस मेहनत का नतीजा है कि समूह अब तक 10,000 रुपये से अधिक की राखियां बेच चुका है। इस अनोखी राखी की मांग केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि देश के बड़े शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है।
लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह की कोषाध्यक्ष नीलम अधिकारी ने बताया कि इन रेशमी राखियों की बाजार में भारी डिमांड है। ये राखियां दिल्ली के साथ ही शिमला और देहरादून भी भेजी जा चुकी हैं। इसके अलावा हल्द्वानी के स्थानीय बाजारों में भी लोग इन्हें खूब पसंद कर रहे हैं। प्रशासन और रेशम विभाग की इस संयुक्त पहल ने न सिर्फ पारंपरिक त्योहार को एक नया रूप दिया है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम बढ़ाया है।
रेशम विभाग की ओर से रेशम कोये से राखी बनवाकर महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजगार दिया गया। रेशम नई पहल स्वयं सहायता समूह और लक्ष्मी मां स्वयं सहायता समूह राखियां बना रही हैं जो देश ही नहीं विदेशों तक पहुंच गई हैं। -हेम चंद्र, उप निदेशक रेशम निदेशालय