हल्द्वानी। वन और वन्यजीवों के संरक्षण की कोशिशों के तमाम दावे कागजी साबित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि जिस गौला काॅरिडोर (एनटीसीए) के लिए 2013 में तत्कालीन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय जयराम रमेश खुद पहुंचे थे और कॉरिडोर बचाने की जद्दोजहद की गई थी, पर वे कोशिशें सफल होती नहीं दिखीं। नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी की रिपोर्ट में माना गया है कि वन्यजीवों के मूवमेंट के लिए जरूरी गौला काॅरिडोर गुम होने के कगार पर है। इसके अलावा मंत्रालय ने जो गौला कार्पस बनाया था, उस पर भी खतरा मंडरा रहा है। इसमें एक साल से राशि नहीं मिल पाई है।
वन्यजीवों के मूवमेंट के लिए गौला कॉरिडोर बेहद महत्वपूर्ण रहा है। पर अवैध कब्जा, निर्माण और विकास योजनाओं के चलते काॅरिडोर पर संकट खड़ा हो गया है। 2013 में तत्कालीन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश, डीजी फाॅरेस्ट, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के विशेषज्ञ समेत अन्य लोग यहां पहुंचे थे। इसके बाद काॅरिडोर को बचाने के लिए कई कदम उठाने के निर्देश पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय मंत्रालय ने वर्ष-2013 में जारी किए थे, इसमें एक प्रमुख वन संरक्षक की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया, पर ये कोशिश कागजी साबित हुई।
नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी आफ इंडिया ने बाघों के आकलन को लेकर रिपोर्ट जारी की है। उसके हैबिटेट क्वालिटी, कनेक्टिविटी और जेनफ्लो वाले अध्याय में उल्लेखित किया गया है कि शिवालिक भूदृश्य और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व को पीलीभीत और दुधवा को जोड़ने में गौला काॅरिडोर महत्वपूर्ण है। पर यह काॅरिडोर करीब खत्म हो गया है और उसे बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
पिछले साल से गौला कार्पस में राशि नहीं दी गई
हल्द्वानी। पर्यावरण मंत्रालय के आदेश पर गौला कार्पस का गठन किया गया था, यह गौला खनन अनुमति की शर्त में शामिल है। इसमें वन निगम को खनिज निकासी से होने वाले लाभांश की एक निश्चित राशि कार्पस को देनी होती है, जिससे वन और वन्यजीवों के संरक्षण के कार्यों लिए तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, रामनगर, हल्द्वानी, तराई पश्चिम और नैनीताल वन प्रभाग में खर्च किया जा सके। पर पिछले साल जनवरी में वन निगम की रायल्टी रेट में संशोधन किया गया था, उसमें यह मद हट गई। अब एक साल से वन निगम के माध्यम से कोई भी राशि गौला कार्पस में नहीं दी जा रही है, जबकि करीब साढ़े पांच करोड़ तक की राशि वन निगम हर सत्र में कार्पस में देता था।
क्या कहते हैं अधिकारी
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं प्रसन्न पात्रो का कहना है कि गौला कार्पस के लिए राशि देने के लिए डीएफओ स्तर से पत्र लिखा गया है। हालांकि अभी कार्पस में पुरानी राशि बची हुई है। वन निगम के आरएम महेश आर्य का कहना है कि जनवरी-2023 में रायल्टी संशोधित की गई थी, इसके बाद से कार्पस में राशि नहीं भेजी जा सकी है।