नैनीताल। सर्द मौसम में बर्फबारी प्रकृति का शृंगार करती है लेकिन पाले की परत जमने से सूखाताल झील भी इन दिनों आकर्षक नजर आ रही है। सुबह-सुबह पाले की चादर मानों बर्फ पड़ने जैसी अनुभूति कराती है।
बता दें कि 1970 तथा 1980 के दशक तक नैनीताल के सूखाताल, कुमाऊं विवि, धामपुर बैंड, अयारपाटा समेत इससे लगे एवं नगर के सीधे धूप के संपर्क में न आने वाले क्षेत्र में अक्सर पानी जमना आम था। रात्रि में कड़ाके की ठंड से पेयजल लाइन तक फट जाती थी। बीते दशकों में बढ़ती बसासत और ग्लोबल वार्मिंग के चलते इसमें कमी आई है।
नगर के स्लीपी होलो, अयारपाटा तथा सूखाताल आदि क्षेत्र में आज भी धूप कम आने से ठंड ज्यादा रहती है। शासन व प्रशासन की ओर से यहां सूखाताल में सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा था जिस पर फिलहाल हाईकोर्ट की रोक है। बताते हैं कि सूखाताल झील नैनीझील को लगभग 40 से 50 फीसदी जलापूर्ति का स्रोत भी है। इन दिनों झील पाला पड़ने से जम सी गई है। झील के किनारे देखकर ऐसा लगता है कि मानों यहां बर्फ पड़ी हो।