हल्द्वानी। शारदीय नवरात्र आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि, सोमवार, 26 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। इस बार माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर अपने दिव्य लोक से भक्तों को आशीर्वाद देने पृथ्वी पर आ रही हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार माता का हाथी पर सवार होकर आना शुभ फलदायक माना जाता है। माता का प्रस्थान नाव से होगा। इस वर्ष देवी का आवागमन पूर्ण शुभता प्रदान करेगा। इससे पहले 25 सितंबर रविवार को अमावस्या तक श्राद्ध रहेंगे और भूलोक में पितरों की सरकार रहेगी।
ज्योतिष त्रिभुवन उप्रेती ने बताया कि रविवार 25 सितंबर को अमावस्या तिथि के दिन पितृ विसर्जन होगा। इस बीच सभी पितर धरती में कुल वंशजों, पारिवारिक लोगों के बीच रहेंगे। 26 सितंबर की सुबह सूर्योदय पूर्व पितर कुल वंशजों को आशीर्वाद देकर पितृ लोक को प्रस्थान करेंगे।
उन्होंने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार पितृविसर्जन का दिन महाशुभ दिन कहा गया है। सभी को इस दिन श्रद्धा भक्ति पूर्वक अपने पितरों को उच्च कोटी के भोजन, दान गाय को ब्राह्मणों को भोजन दक्षिणा देकर पितरों को सम्मान सहित विदा करना चाहिए। वृद्ध, असहाय, गरीब, गाय, कौवे, को भोजन कराना चाहिए। यह दिन छूटे हुए ज्ञात-अज्ञात पितरों को याद करने का दिन है। अमावस्या तिथि को पीपल वृक्ष के पास तर्पण करने से कोटी कोटी यज्ञ फल प्राप्त होता है।
उन्होंने बताया कि महापर्व नवरात्र का शुभ मुहूर्त 26 सितंबर को सुबह 8:36 बजे से शुरू होगा। विजया दशमी पांच अक्तूबर को मनाई जाएगी। नवरात्री देवी भगवती के नौ रूपों की पूजा का महात्म्य कहा गया है। जो भी व्यक्ति स्त्री, पुरुष, कन्या नवरात्रि का व्रत पूजन करते है उन्हें समृद्धि, पुत्र, सौभाग्य, धन, विद्या, ममता, सुख, करुणा की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ हस्त नक्षत्र और सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि योग में हो रहा है, जो जनमानस की उन्नति के लिये शुभ फल प्रदान करेगा। पूरे नौ दिन दुर्गा महोत्सव रहेगा जिसमें प्रतिदिन का भोग और रात्रि के समय माता को मीठा दूध अर्पित करना चाहिए।
ऐसे करें पूजन
शुद्ध होकर घर की सफाई कर मंदिर में कलश स्थापना करें। अखंड दीपक जलाने के बाद विधिविधान से हरेला बोएं। संकल्प लेकर स्वस्ति वाचन, गणेश पूजन, मातृका पूजन, देवी पूजन पाठ करें। अलग अलग दिन अलग अलग देवियों का व्रत कर पूजन करें। पान सुपारी, नारियल वस्त्र धूप दीप प्रतिदिन समर्पित करें। नवरात्र के अंतिम दिन 10 वर्ष के नीचे की कन्याओं का पूजन करें। इस दौरान प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाना चाहिए।
शुभ-अशुभ...
नवरात्र देवी उपासना, आराधना तंत्र मंत्र साधना, ग्रह पूजन, जप आदि के लिए शुभ मानी गई है लेकिन नवरात्र में नूतन ग्रह प्रवेश, मुंडन, अशुभ कहा गया है। 26 सितंबर सोमवार को प्रतिपदा के साथ शैल पुत्री पूजन, 27 को ब्रह्मचारिणी, 28 को चंद्रघंटा, 29को कुष्मांडा, 30 को स्कंदमाता, एक अक्तूबर को कात्यायनी देवी व्रत, दो अक्तूबर को कालरात्रि, तीन अक्तूबर को महागौरी, महादुर्गा अष्टमी, सरस्वती व्रत और पूजन होगा। मंगलवार चार अक्तूबर को सिद्धिदात्री, महानवमी व्रत और बुधवार पांच अक्तूबर को विजयादशमी, हरेला पूजन और दुर्गा विसर्जन होगा।