करीब ढाई तीन साल के इंतजार के बाद दुष्कर्म पीड़िता को न्याय मिला। किशोरी के साथ दुष्कर्म करने वाले उसके पड़ोसी पिता-पुत्र को कोर्ट ने बीस-बीस साल के कारावास की सजा सुनाते हुए पीड़िता को प्रतिकर दिलाने के आदेश दिए हैं।
रामनगर क्षेत्र की एक महिला ने 16 जनवरी 2020 को रामनगर थाने में पड़ोस में रहने वाले एक युवक और उसके पिता पर नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला के मुताबिक 16 जनवरी को जब वह बाजार गई थी तो उसकी 14 वर्षीय बेटी घर पर अकेली थी। जब वह वापस लौटी तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था। खटखटाने के बाद घर के अंदर से पड़ोसी युवक तेजी से बाहर भागा।
अंदर जाकर जब उसने बेटी से बातचीत की तो रोते-बिलखते किशोरी ने आपबीती सुनाई और उसके साथ दरिंदगी की बात कही। बातचीत में किशोरी ने युवक के पिता पर भी दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इसके बाद महिला ने रामनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 18 जनवरी 2020 को पुलिस ने आरोपी युवक के पिता और नौ जुलाई 2020 को फरार चल रहे युवक को भी गिरफ्तार कर लिया था। 12 जनवरी 2021 को मामला कोर्ट पहुंचा और उसके बाद मामले की सुनवाई शुरु हुई।
किशोरी को न्याय दिलाने के लिए एडीजीसी नवीन चंद्र जोशी केस लड़ रहे थे। कोर्ट में उन्होंने आरोपियों के खिलाफ आठ गवाह पेश किए। पूरी सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश (स्पेशल जज पॉक्सो) नंदन सिंह की बेंच ने दोनों पिता-पुत्र को दोषी मानते हुए बीस-बीस साल के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोष से दुष्कर्म पीड़िता को चार लाख रुपये प्रतिकर दिलाने के भी आदेश दिए हैं।