हल्द्वानी। प्रमुख वन संरक्षक वन पंचायत कार्यालय सरकारी उपेक्षा का शिकार है। 39 साल पुराना यह दफ्तर मरम्मत के अभाव में जीर्ण शीर्ष हालत में पहुंच गया है। कार्यालय की एक तरफ की दीवार बाहर की ओर झुक गई है। जगह-जगह प्लास्टर उखड़ रहा है और सरिया निकल रही है। दफ्तर के पीछे बना चौकी गार्ड भवन खंडहर हो चुका है। फिर भी इसका कोई इसका पुरसाहाल नहीं है।
वन संरक्षण के लिए 1984 में आधुनिक वन अग्निशमन परियोजना कार्यालय रामपुर रोड में स्थापित किया गया था। राज्य बनने के बाद इसे प्रमुख वन संरक्षक वनाग्नि एवं विधिक प्रकोष्ठ कार्यालय में तब्दील कर दिया गया। 2017-18 में इस कार्यालय को देहरादून स्थित मुख्यालय शिफ्ट कर दिया गया। वर्तमान में यहां प्रमुख वन संरक्षक वनपंचायत एवं संयुक्त वन प्रबंधन कार्यालय संचालित हो रहा है। यहां कुमाऊं की वन पंचायतों से संबंधित कार्य होते हैं।
प्रमुख वन संरक्षक कभी-कभार यहां पहुंचते हैं जबकि मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी, सांख्यिकी अधिकारी (एसओ, एएसओ) के साथ ही आठ तृतीय श्रेणी और 12 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यहां खौफ के साये में काम करने को मजबूर हैं। जर्जर हाल इस कार्यालय मे किसी भी वक्त बड़ी अनहोनी हो सकती है। पूर्व में यहां बरामदे की दीवार ढहते समय कर्मचारी बाल-बाल बचे थे। बारिश के दिनों में कार्यालय में सीलन रहती है और पानी रिसता है। कार्यालय में कई दस्तावेज को दीमक चट कर चुकी हैं। यहां पास में बने कर्मचारियों के आवासीय परिसरों की दशा भी खराब है। यहां के हालात पूरी तरह रामभरोसे हैं। प्रमुख वन संरक्षक वन पंचायत पराग मधुकर धकाते का कहना है कि भवन की मरम्मत समेत अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
डंपिंग जोन बना आवासीय परिसर
हल्द्वानी। प्रमुख वन संरक्षक वन पंचायत का आवासीय परिसर डंपिंग जोन में तब्दील हो गया है। यहां क्विंटलों कचरा बिखरा हुआ है। सालों से यहां कोई नहीं रहता। देखरेख के अभाव में आवासीय परिसर में कूड़े का पहाड़ बन रहा है।
कबाड़ में तब्दील हुए करोड़ों के वाहन
हल्द्वानी। 1989 में जब यहां आधुनिक वन अग्निशमन परियोजना कार्यालय हुआ करता था। तब यहां वन विभाग के वाहनों को रखने के लिए 10 गैराज बनाए गये थे। कई वाहन उपयोग के अभाव में कबाड़ बन गए हैं। दो अग्निशमन वाहन, तीन बुल्डोजर और अन्य वाहन यहां पड़े-पड़े खराब हो गए। लोग वाहनों के पार्ट्स तक चोरी कर ले गए हैं।