नैनीताल। सतत विकास के लिए कृषि, जैविक और एप्लाइड विज्ञान में वर्तमान दृष्टिकोण पर 9वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कुमाऊं विवि के हरमिटेज स्थित देवदार सभागार में आयोजित किया गया। इसमें विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत मुख्य अतिथि रहे। इस दौरान वक्ताओं ने हिल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
शुक्रवार को हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मीकांत ने टिकाऊ कृषि के विभिन्न पहलुओं, स्थिरता और लाभप्रदता पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने उत्तराखंड की जैव विविधता और इससे किसानों को होने वाले लाभ के बारे में बताया। हंगरी के डॉ. गबोर टाकौली ने गुणवत्ता वाले भोजन के बारे में बताया। कुविवि के डीन एग्रीकल्चर व एग्रोफोरेस्ट्री प्रो. जीत राम ने ड्रिप इरिगेशन के माध्यम से हिल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया। तकनीकी सत्र में विभिन्न शोध कार्यों के 22 ओरल तथा 25 पोस्टर प्रेजेंटेशन संपादित किए गए।
इससे पूर्व डॉ. छत्रपाल ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम में डीएसबी परिसर की निदेशक डॉ. नीता बोरा शर्मा, डॉ. संजय कुमार झा आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन करते हुए निदेशक विजिटिंग प्रोफेसर ललित तिवारी ने कृषि की पुरानी एवं नई नीतियों पर प्रभाव डाला। इस मौके पर कुलसचिव दिनेश चंद्रा, प्रो. चित्रा पांडे, प्रो. पदम बिष्ट, प्रो. अतुल जोशी, प्रो. एमएस मावड़ी, प्रो. रितेश शाह, प्रो. हरीश बिष्ट, प्रो. आशीष तिवारी आदि मौजूद रहे।