हल्द्वानी। गौला नदी का जलस्तर घटकर 110 क्यूसेक पहुंच गया है। इस साल जनवरी माह में नदी का जलस्तर 160 क्यूसेक के करीब था। मार्च में बारिश होने पर जलस्तर बढ़कर 204 क्यूसेक पहुंच गया था जिसके बाद से लगातार जलस्तर में गिरावट दर्ज हो रही है। इससे सिंचाई का संकट भी खड़ा हो गया है। नहरों में तीन दिन बाद पानी छोड़ा जा रहा है।
खेतों में इन दिनों मक्के की बुआई चल रही है, लेकिन गौला नदी का जलस्तर घटने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर है। वहीं लो वोल्टेज की समस्या के कारण कई इलाकों में ट्यूबवेल से भी किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। गौला नदीं से चार नहरों में पानी छोड़ा जाता है। गौलापार नहर में निर्माण कार्य के चलते पूरे गौलापार क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था पटरी से उतरी गई है। फिलहाल देवलचौड़, लालकुआं और कठघरिया नहर में ही पानी छोड़ा जा रहा है। गौला नदीं का जलस्तर कम होने से नहरों में तीसरे दिन बाद भी पर्याप्त पानी मिल रहा है।
गौला नदी से 30 क्यूसेक पानी शीशमहल फिल्टर प्लांट के लिए छोड़ा जाता है। इसके बाद नहरों में पानी छोड़ा जाता है। एक नहर से 100 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है लेकिन जलस्तर कम होने से 60 से 70 क्यूसेक पानी ही नहरों को मिल पा रहा है। गौलापार के किसान नीरज रैक्वाल ने बताया कि गौलापार नहर के कार्य के चलते सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लो वोल्टेज की समस्या के कारण ट्यूबवेल भी काम नहीं कर रहे है। ऐसे में मक्के और सब्जियों की सिंचाई के लिए पशुओं के लिए भी पानी की पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।
गौला बैराज पर तैनात सहायक अभियंता मनोज तिवारी ने बताया कि 30 क्यूसेक पानी जल संस्थान को दिया जाता है। बाकी पानी नहरों में छोड़ा जाता है। नहरों में रोस्टर के हिसाब से पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं गौलापार डिवीजन के एसडीओ सुभाष जोशी ने बताया कि गौलापार नहर में कार्य चल रहा है। इस कारण चार से 18 अप्रैल तक गौलापार नहर बंद रहेगी। संवाद