ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण फैले संक्रमण को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में स्थायी जांच समिति गठित कर दी है। समिति को सात दिन के भीतर कारण, जिम्मेदारी और सुधारात्मक कार्यवाही की स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
समिति में सीडीओ के अलावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पेयजल निगम व जल संस्थान के अधिशासी अभियंता, नगर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी व जिला पंचायत राज अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। आदेश में कहा गया है कि पेयजल स्रोत, टैंक, पाइपलाइन में लीकेज, सीपेज, क्रॉस-कनेक्शन और सीवरेज सिस्टम के साथ संभावित इंटरलिंक का तकनीकी और स्वास्थ्यगत परीक्षण जरूरी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच संस्थागत समन्वय और सतत अनुश्रवण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
समिति न केवल ज्योलीकोट प्रकरण की जांच करेगी बल्कि पूरे जनपद में पेयजल जनित संक्रमण की रोकथाम के लिए स्थायी निगरानी तंत्र के रूप में भी काम करेगी। प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डोर-टू-डोर सर्विलांस, हेल्थ कैंप और दवा वितरण भी कराया जाएगा।
समिति को करना होगा यह सब
- पेयजल स्रोत, टैंक और लाइनों की सफाई, फ्लशिंग, ब्लीचिंग और क्लोरीनेशन
- पाइपलाइनों में लीकेज और तकनीकी खामियों को चिन्हित कर ठीक कराना
- यूनियन जंक्शन और इंटरसेक्टिंग लाइनों की जांच और सुधार
- पेयजल और सीवरेज लाइनों को अलग कर क्रॉस-कंटैमिनेशन रोकना
- पानी के सैंपल लेकर लैब टेस्ट और वैकल्पिक सुरक्षित पेयजल व्यवस्था
- पुनरावृत्ति वाले संवेदनशील स्थलों की पहचान कर स्थायी कार्ययोजना