हल्द्वानी। जो हल्द्वानी कभी देशभर के राज्यों और दूसरे देशों में टमाटर भेजता था, आज खुद टमाटर की किल्लत से जूझ रहा है। पहाड़ पर बारिश के कारण जगह-जगह सड़कें बंद होने से टमाटर मंडी तक नहीं पहुंच रहा। कुछ फसल टमाटर में फंगस लगने से बार्बाद हो गई है।
टमाटर की कमी दूर करने के लिए हिमाचल, बंगलुरु आदि राज्यों से टमाटर मंगाया जा रहा था। बारिश और कांवड़ यात्रा के कारण हो रही जाम की समस्या के चलते समय पर नहीं पहुंच रहा जिससे कुमाऊं की मंडी हल्द्वानी में टमाटर के भाव आसमान छू रहे हैं।
हल्द्वानी गौलापार का हल्द्वानी मंडी में नवंबर से मार्च तक आता है। उसके बाद बंगलुरु, हिमाचल के अलावा कुमाऊं के पर्वतीय इलाकों गरमपानी, पदमपुरी, अरचुना, चाफी से टमाटर की आवत मंडी में होती है। मुख्य उद्यान अधिकारी आरके सिंह के अनुसार जिले के मैदानी इलाकों में पिछले साल तक 1580 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 21700 मीट्रिक टन और पहाड़ी क्षेत्रों में 350 हेक्टेयर में 2500 मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन हुआ। इस बार पहाड़ों पर बड़ी मात्रा में टमाटर की फसल में फंगस लगने से करीब 40 से 50 फीसदी टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है। कुछ टमाटर जलभराव वाली जगहों पर होने के कारण खराब हो गया।
इधर, मंडी निरीक्षक भुवन गोस्वामी ने बताया कि मंडी में इस समय सप्ताह में कुल 100 क्विंटल टमाटर आ रहा है। पिछले साल तक यह प्रतिदिन 50 से 60 क्विंटल था जिसमें बंगलुरु से दो हजार रुपये प्रति कैरेट के हिसाब से और पहाड़ से 1300 से 1400 रुपया प्रति पेटी टमाटर शामिल है। इसी भाव से ऊधमसिंहनगर, पीलीभीत जाता है। मंडी सचिव दिग्विजय सिंह देव ने बताया कि उपभोक्ताओं तक टमाटर की पहुंच हो सके इसलिए मंडी में दस दिनों से अलग से काउंटर लगाकर 65 और अब 70 रुपये किलो टमाटर उपलब्ध कराया जा रहा है। मंडी परिषद की कोशिश है कि किसी भी तरह लोगों तक सस्ता टमाटर उपलब्ध हो और बाजार की कीमतों में कमी आ सके।