नैनीताल। शहर की सबसे ऊंची चोटी नैनापीक में पिछले काफी समय से रूक रूक कर भूस्खलन होता रहा है और पहाड़ी के पत्थर नीचे की ओर आबादी क्षेत्र तक पहुंचते रहे हैं। बारिश के दौरान खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसे देखते हुए वन विभाग ने पूर्व में पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों को रास्ते में ही रोकने के लिए 51 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजकर बजट की मांग की थी लेकिन अभी तक वन विभाग को एक रुपया भी नहीं मिला है जिसके चलते नैनापीक की पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों को रोकथाम को लेकर कोई पहल नहीं हुई है। ऐसे में इस क्षेत्र में कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
पिछले साल जुलाई में नैना पीक की पहाड़ी दरकने लगी थी और पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर निचले क्षेत्र में आबादी की ओर गिरने से लोग भयभीत हो गए थे। जिला प्रशासन की ओर से निरीक्षण के बाद गिरते मलबे व पत्थरों की रोकथाम की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई। वन विभाग के अधिकारियों ने नैनापीक क्षेत्र में मौका मुआयना कर गिरते मलबे व पत्थर को रोकने के लिए प्रस्ताव बनाया लेकिन प्रस्ताव के अनुरूप विभाग को बजट नहीं मिला।
दो दिन पहले हुई बारिश व ओलावृष्टि के दौरान भी नैनापीक की पहाड़ी से आबादी की ओर पत्थर गिरे हैं। जिसके चलते पहाड़ी की तलहटी में रह रहे लोगों पर खतरा बना हुआ है। डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि क्षेत्र में पहाड़ी से गिरते पत्थरों व मलबे को रोकने के लिए वायर क्रेट वाल निर्माण करने की योजना बनाई गई है। पहाडी़ में 300 मीटर लंबी दीवार बनाने के लिए जिला प्रशासन को 51. 18 लाख का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। बताया कि फिलहाल बजट जारी नहीं हुआ है। बजट मिलते ही सुरक्षा कार्य शुरू करा दिए जाएंगे।