हल्द्वानी। राज्य आंदोलनकारी बीते 11 सालों से आरक्षण की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब तक यह मामला नहीं सुलझ पाया है। वर्ष 2004 में तत्कालीन सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण दे दिया था लेकिन वर्ष 2011 में इस शासनादेश के खिलाफ दायर याचिका में सुनवाई के बाद आरक्षण में रोक लग गई। इस शासनादेश में रोक लगने के बाद आज तक बहाली नहीं हो पाई है। तब से राज्य आंदोलनकारी लगातार 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2011 मेें राज्य आंदोलनकारियों को दिए गए आरक्षण पर रोक के बाद अब तक कई सरकारें आई लेकिन आंदोलनकारियों की क्षैतिज आरक्षण की उम्मीद को पूरा नही कर पाई।
क्या कहना है राज्य आंदोलनकारियों का
उत्तराखंड के निर्माण में राज्य आंदोलनकारियों का महत्वपूर्ण योगदान है। सरकारों की अनदेखी के कारण अब तक आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है। मौजूदा सरकार से उम्मीद है कि क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
- पार्वती तिवारी, राज्य आंदोलनकारी
राज्य आंदोलनकारियों ने आंदोलन के दौरान घर बार छोड़कर दिन.रात संघर्ष किया। 2011के बाद आंदोलनकारियों को मिले क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगाई गई है। आरक्षण राज्य आंदोलनकारियों का हक है। उसे लागू किया जाए।
- देवी शर्मा, राज्य आंदोलनकारी
उत्तराखंड राज्य आंदोलकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण न दिया जाना अन्याय है। महिलाओं और खिलाड़ियों की तर्ज पर राज्य सरकार को आंदोलनकारियों को भी आरक्षण देकर उनकी भावनाओं को समझना चाहिए।
- प्रदीप सिंह अंनेरिया, राज्य आंदोलनकारी
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी बीते 11 सालों से आरक्षण की मांग कर रहे हैं। सरकार अनदेखी कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों को क्षैतिज आरक्षण दिया जाना चाहिए।
- विनोद घड़ियाल, राज्य आंदोलनकारी