रुद्रपुर/गदरपुर। गदरपुर के पिपलिया नंबर एक गांव में शनिवार को करीब 45 लोगों को एकसाथ उल्टी-दस्त (डायरिया) की शिकायत हो गई। गांव में ही मायके आई डायरिया पीड़ित महिला की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर कई मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जबकि कुछ मरीजों को 108 एंबुलेंस के माध्यम से रुद्रपुर जिला अस्पताल और गदरपुर सीएचसी में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल में भर्ती एक महिला की हालत गंभीर है। एसडीएम राकेश तिवारी और तहसीलदार देवेंद्र बिष्ट ने मौका मुआयना किया।
प्रधान मुकेश बाला ने बताया कि शुक्रवार रात नीलू (54) की तबीयत खराब हुई थी। उसके बाद केशव की तबीयत बिगड़ी। फिर शनिवार को एकसाथ कई लोगों को उल्टी-दस्त होने लगे। हालत बिगड़ने पर 25 वर्षीय मीना, 23 वर्षीय संगीता, 12 वर्षीय स्नेहा का इलाज सीएचसी गदरपुर में किया गया। कई मरीजों को जिला अस्पताल भेजा गया। इसी दौरान पिपलिया नंबर एक निवासी फटीक विश्वास की पुत्री लतिका (35) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने उसकी मौत का कारण उल्टी-दस्त होना बताया।
परिजनों के मुताबिक लतिका कुछ समय पूर्व जसपुर स्थित अपने ससुराल से मायके आई थी। डॉ. सरना ने बताया कि लतिका की मौत पूर्व ग्रसित बीमारी से हुई है। उसके पति वीरेंद्र का भी निधन हो चुका है। वह अपने पीछे 13 वर्षीय पुत्री काजल, 10 वर्षीय पुत्र दीपांशु को छोड़ गईं। ग्राम मजरा शीला के डायरिया पीड़ित चार मरीजों को सीएचसी में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर 54 वर्षीय कृष्णा देवी को जिला अस्पताल रेफर किया गया। सूचना मिलने पर रुद्रपुर से एसीएमओ डॉ. तपन शर्मा, सीएचसी गदरपुर के प्रभारी डॉ. संजीव सरना, पीएचसी महेशपुर के डॉ. बलबीर सिंह ने पिपलिया गांव जाकर कई मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
डॉ. सरना ने बताया कि भीषण गर्मी और प्रदूषित खानपान से लोगों की तबीयत खराब हुई है। डॉक्टरों की टीम ने गांव में करीब 29 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। गंभीर 12 मरीजों को जिला अस्पताल और चार लोगों को सीएचसी गदरपुर भेजा गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में टंकी से पानी आपूर्ति होती है। करीब 80 प्रतिशत लोग इसी टंकी का पानी पीते हैं। इसी टंका का दूषित पानी पीने से डायरिया फैला है। डॉक्टरों ने डायरिया से बचने के लिए बासी भोजन न करने, हमेशा उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों की भीड़
रुद्रपुर। गदरपुर से उल्टी दस्त के मरीजों के एक साथ जिला अस्पताल पहुंचने पर इमरजेंसी में मरीजों और तीमारदारों की भीड़ जुट गई। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. गगनदीप ने सभी मरीजों को वार्ड में भर्ती करवाया। डॉ. गगनदीप ने बताया कि सभी मरीजों में डायरिया के लक्षण मिले हैं। उन्होंने भी दूषित पानी को डायरिया का कारण माना है। पीएमएस डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती अधेड़ नीलू की हालत गंभीर होने पर उन्हें एसटीएच रेफर किया गया है। इसी गांव के 70 वर्षीय नकुल, 54 वर्षीय कृष्णा देवी, 50 वर्षीय मंजू बाला, 40 वर्षीय किरन विश्वास, 35 वर्षीय तनुजा, 30 वर्षीय सुमित्रा विश्वास, 28 वर्षीय अनीता विश्वास, 20 वर्षीय निकिता, 16 वर्षीय संगीता का इलाज किया जा रहा है।
पिपलिया गांव में जिस महिला की मौत हुई, उसे दूसरी बीमारी भी थी। डायरिया से उसकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। पेयजल टंकी के दूषित पानी के पीने से लोगों के डायरिया के चपेट में आने की आशंका है। पानी के नमूने लिए गए हैं इन्हें जांच के लिए जलसंस्थान को दिया गया है। डायरिया से बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। - डॉ. सुनीता चुफाल रतूड़ी, सीएमओ, ऊधम सिंह नगर।