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नैनीताल में ऐसी वीरानगी जिसकी कभी कल्पना भी न थी

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मंदिर सूना, मस्जिद सूनी, सूना है गुरुद्वारा - नौकाओं को झील में उतरने का इंतजार। चंद्रेश पांडे, नैनीताल। महीने भर पहले किसी ने ऐसी कल्पना भी नहीं की होगी कि साल भर सैलानियों से गुलजार रहने वाला विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल नैनीताल इस तरह से सूना हो जाएगा और यहां चप्पे चप्पे पर सन्नाटा पसरा रहेगा। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च के दरवाजे भक्तों के लिए बंद हो जाएंगे। माल रोड वीरान नजर आएगी और बाजारों में ताले लटक जाएंगे। लॉकडाउन के बाद कुछ ऐसा ही नजारा नैनीताल का है। पर्यटन व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध नैनीताल को लाक डाउन से लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है वहीं सैकड़ों लोग रोजी रोटी को मोहताज हो चुके हैं। नैनीताल में साल भर सैलानियों का आवागमन होता है जिसके चलते यहां चप्पे-चप्पे पर रौनक बनी रहती थी। अप्रैल प्रथम सप्ताह से ही नैनीताल के होटल व्यवसायियों से लेकर पर्यटन कारोबार से जुड़े सैकड़ों लोग सीजन की तैयारियों में जुट जाते थे। अप्रैल में तराई भाबर में गर्मी बढ़ने व नवरात्र, गुड फ्राइडे समेत कई अवकाश होने के कारण बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंचने लगते थे लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं है। नैनीताल के वह होटल जहां पिछले साल तक अप्रैल में देशी विदेशी सैलानी ठहरते थे वह अब अस्पताल में तब्दील कर दिए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर कोराना संक्रमण प्रभावितों को क्वारंटीन किया जा सके। तल्लीताल का रोडवेज स्टेशन हो या सैल्फी प्वाइंट, अपर और लोअर माल रोड हो या मल्लीताल स्थित पंत पार्क से लेकर सभी बाजारों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक कर्फ्यू में छूट होने के कारण कुछ चहल पहल बाजारों में नजर आ रही है लेकिन दोपहर एक बजे के बाद सड़कों पर यदि कोई नजर आ रहा है तो वह हैं पुलिस कर्मी। हाथों में डंडा लिए बेवजह घूमने वालों को टोकते फटकराते। नैनीताल में दर्जन भर से अधिक ऐसे पिकनिक स्पाट हैं जहां सीजन के दौरान रोजाना चार से पांच सौ सैलानी पहुंचते थे। इनमें चिड़ियाघर, केव गार्डन, रोपवे, स्नोव्यू, हनुमानगढ़ी आदि प्रमुख हैं लेकिन अब यहां भी पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। इनसेट : नौकाओं को झील में उतरने का इंतजार : नैनीताल। नैनीताल में पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है नैनीझील। आमतौर पर इस झील में तीन सौ से अधिक नौकाएं हैं। पर्यटक सीजन के दौरान अधिकांश नौकाएं दिन भर झील के पानी में लहराती नजर आती थी लेकिन लाक डाउन के बाद नौका स्टेंड वीरान हैं और सभी नावें अपने स्टेंड में खूंटे से बंधी हुई हैं। साढ़े चार सौ से अधिक नौका चालाक बेरोजगार हो चुके हैं। कुछ नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में अपने घरों में किसी तरह रोजी रोटी के इंतजाम कर रहे हैं तो कई ऐसे भी हैं जो कुमाऊं के अलग अलग क्षेत्रों के थे और लॉकडाउन होते ही वह अपने अपने घरों को लौट गए। नौका चालक मोहन सिंह का कहना है कि अप्रैल के प्रथम हफ्ते में वह औसतन रोजाना आठ सौ से हजार रूपये तक कमा लेते थे लेकिन अब वह दाने दाने को मोहताज हैं। नौका चालक उमेश व गुलशन का कहना है कि लॉकडाउन के बाद से परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है। यही हाल रिक्शा चालकों का भी है। रिक्शा चालक मिथुन व जगदीश का कहना है कि आमतौर पर वह चार-पांच सौ रूपये कमा लेते थे लेकिन अब एक रूपया भी नहीं कमा पा रहे हैं जो बचत भी वह भी दिन बीतने के साथ खर्च हो रही है।
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