डीजीपी एमए गणपति ने कहा पुलिस को आंतरिक और बाहरी दबाव की बहानेबाजी छोड़नी होगी। अब व्यवसायिक तर्ज पर पुलिस फोर्स को काम करना होगा, तभी अपराध पर अंकुश लगेगा।
भविष्य को ध्यान में रखते हुए आर्थिक अपराध पर पहले बैंक मैनेजर की तरह नियम को लागू करने में क्या खामियां हुईं, इस बात पर विवेचक को ध्यान देना होगा। विवेचना के लिए पुलिस को अपना सही तर्क रखना होगा।
सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार के दौरान डीजीपी ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए भविष्य के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि पुलिस को कार्य करने के अपनी क्षमता, सही नीयत और समय के अनुसार नॉलेज को बढ़ाना होगा।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में आत्मदाह का प्रयास कर रहे एक व्यवसायी को गिरफ्तार कर पुलिस ने व्यवसायिक स्तर पर अच्छा काम किया है, जो सराहनीय है। आगे भी अपराध रोकने के लिए पुलिस को तत्काल कार्रवाई कर अपनी उपस्थिति जतानी होगी। पुलिस अक्सर बहाना बनाती है कि काम का दबाव है।
विश्लेषण से पता चला है कि पुलिस पर 70 फीसदी आंतरिक और 20 या 30 फीसदी बाहरी दबाव रहता है। बाहरी दबाव को संवाद स्थापित कर कम किया जा सकता है। देश में सजा का प्रतिशत 45 है, जो लोग अपराध करने के बाद छूट जाते हैं। वे सड़क पर कानून का माखौल उड़ाते हैं।
उन्होंने कहा कि नेचुरल विवेचना होने पर साक्ष्य थोड़े कम रहेंगे, लेकिन काम चल जाएगा। मगर, शार्टकट से काम करने से भविष्य में परेशानी बढ़ेगी। सेमिनार को डीआईजी अजय रावत और एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने भी संबोधित किया। संचालन सीओ लोकजीत सिंह ने किया।
कहां हैं वर्मा, बॉलीवुड में काम मिल जाएगा
सीओ लोकजीत सिंह ने किशोर और बच्चों को लेकर एक वीडियो फिल्म तैयार की है। इस वीडियो की मीडियाकर्मी और पुलिसकर्मी ने काफी सराहना की। फिल्म में दिखाया गया कि थानाध्यक्ष बच्चों को चोरी और शराब पीने के अपराध में हवालात में डाल देता है।
इस बीच जुवेनाइल टीम आकर बच्चों को छुड़ाती है। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया जाता है। थानाध्यक्ष का रोल यातायात प्रभारी डीएल वर्मा ने बेहतरीन ढंग से निभाया है। डीजीपी ने फिल्म देखने के बाद मजाक किया कि कहां है डीएल वर्मा, इंस्पेक्टर तो बन नहीं पाए, लेकिन बॉलीवुड में काम मिल जाएगा।