हल्द्वानी जेल अब ऑनलाइन हो गयी है। मंगलवार को इसकी शुरुआत जेल से ही मुल्जिमों की ‘पेशी’ से हुई । जेल अधिकारियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से पांच मुल्जिमों को जज के सामने पेश कराया।
इस व्यवस्था से एक तरफ सुरक्षा का खर्च बचेगा, वहीं पुलिस कस्टडी से मुल्जिमों के फरार होने का खतरा खत्म हो जाएगा। सितारगंज और चमोली जेल में ब्रांड बैंड का संचालन नहीं होने के कारण यह दोनों जेल ऑन लाइन नहीं हो पाई हैं।
जेल अधिकारियों ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए एसीजेएम की कोर्ट के समक्ष तीन मुल्जिमों और जेएम द्वितीय के समक्ष दो मुल्जिमों को पेश कराया। पता चला है कि दो सप्ताह से वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए जेल से ट्रायल चल रहा था । जेल अधीक्षक मनोज आर्या ने वीडियो कांफ्रेंसिंग की सफलता की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि अन्य अदालतों के अलावा हाईकोर्ट से भी अब वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा हो गई है। हल्द्वानी उपकारागार में नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के सात सौ से अधिक कैदी हैं। इन मुल्जिमों को अदालत भेजने के लिए जेल को वाहन के अलावा सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करनी पड़ती थी।
समय से व्यवस्था करना काफी मुश्किल होता था। जिला पुलिस से बार बार मुल्जिमों को भेजने के लिए सिपाहियों को भेजने का अनुरोध करना पड़ता था। वीडियो कांफ्रेंसिंग व्यवस्था सफल होने से वाहन खर्च, सुरक्षा खर्च बचेगा। वहीं पुलिस कस्टडी से मुल्जिमों के भागने का खतरा भी खत्म हो गया है।
नैनीताल जेल भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ गई है लेकिन सितारगंज और चमोली जेल में ब्रांड बैंड नहीं चल रहा है। इस कारण इन दो जेलों में अदालत से वीडियो द्वारा संपर्क करना अभी मुश्किल होगा।