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शेरवुड के गार्ड ने मासूम से किया था कुकर्म

Sun, 07 Feb 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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 विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) प्रीतू शर्मा की अदालत ने आईएएस अधिकारी के पुत्र से कुकर्म मामले में सुनवाई के बाद गार्ड को दोषी पाया है। वहीं, कालेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू और वार्डेन रवि पंत को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाते हुए बरी कर दिया। गार्ड के सजा की अवधि पर 12 फरवरी को अदालत अपना फैसला सुनाएगी।
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अभियोजन पक्ष के विशेष अभियोजक नरेंद्र सिंह नेगी के अनुसार छह अक्तूबर 2014 को शेरवुड के छात्र पिकनिक मनाने के बाद रात में हास्टल आकर सो गए। सोते समय कॉलेज के गार्ड ने कक्षा चार में पढ़ने वाले आईएएस अधिकारी के पुत्र के साथ रात 12 बजे और एक बजे कुकर्म किया।

छात्र के विरोध करने पर वह नहीं माना। सुबह होने पर मैटर्न जब बिस्तर बदलने के लिए आई तो बच्चे ने उससे शिकायत की। धीरे-धीरे यह मामला वार्डेन रवि पंत और प्रधानाचार्य अमनदीप संधू तक पहुंच गया। प्रधानाचार्य ने इस मामले में छात्र के दिल्ली में रहने वाले पिता से बात की।
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प्रधानाचार्य ने पिता से उस समय बात नहीं कराई। दूसरे दिन छात्र के पिता खुद स्कूल में आए। उन्होंने बेटे से बातचीत कराने का निर्णय लिया, लेकिन प्रधानाचार्य रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तैयार नहीं थे। अंत में पिता ने नौ अक्तूबर को तल्लीताल थाने में तहरीर दी।

पुलिस ने प्रधानाचार्य पर 21 पाक्सो एक्ट, वार्डेन रवि पंत पर जुमेनाइल एक्ट और गार्ड आकाश मंडल पर धारा 377, 511 और पाक्सो 8,10,18 के तहत मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में एडिशनल एसपी श्वेता चौबे और एसआई श्वेता नेगी ने विवेचना की।

चार्जशीट दायर होने के बाद अदालत में अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के समर्थन में सात गवाह पेश किया। अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि प्रधानाचार्य ने रिपोर्ट इसलिए दर्ज नहीं कराई, क्योंकि वह पिता के आने का इंतजार कर रहे थे।

वहीं अभियोजन पक्ष इस दलील को गलत साबित कर रहा था। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद गार्ड आकाश मंडल को कुकर्म के लिए दोषी माना। अदालत के निर्देश पर पुलिस ने गार्ड को कस्टडी में लेकर उसे जेल भेज दिया।  

विशेष लोक अभियोजक एनएस नेगी का कहना था कि अदालत का फैसला लेने के बाद वह प्रधानाचार्य और वार्डेन पर कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इसी प्रकार सजायाफ्ता गार्ड के वकील वीसी जोशी ने कहा कि अदालत के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले के खिलाफ वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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