नशा उन्मूलन के लिए एक ओर सरकार तमाम केंद्र खोल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंधित दवाओं को बिना पर्चे के बेचकर मेडिकल स्टोर स्वामी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
हल्द्वानी में होलसेल, स्टाकिस्ट और रिटेल की मिलाकर लगभग 450 दुकानें हैं। लाइफ सेविंग के नाम से आने वाली नशीली दवाओं का कारोबार प्रतिमाह 20 से 25 लाख रुपये का है।
शेड्यूल एच वन की दवाओं की बिक्री को लेकर बकायदा गाइड लाइन हैं। प्रत्येक मेडिकल स्टोर स्वामी को गाइड लाइनों का पालन करना जरूरी है।
गाइड लाइन के अनुसार शेडयूल एच वन में आने वाली दवाओं की बिक्री के दौरान मेडिकल स्टोर स्वामी को डॉक्टर के पर्चे की छायाप्रति, मरीज का नाम, मोबाइल नंबर और कितनी दवा (टेबलेट या सिरप की संख्या) दर्ज करनी होगी।
डॉक्टर ने दवा जितनी लिखी है उससे अधिक एक भी टेबलेट या सिरप नहीं दिया जा सकता है। ये ऐसी दवा है जो जीवनरक्षक हैं, मगर कुछ दवाओं का प्रयोग युवा पीढ़ी नशे के रूप में कर रही हैं।
कुमाऊं में छह जिले हैं और ड्रग इंस्पेक्टर मात्र दो हैं। ऐसे में आप स्वयं अंदाज लगा सकते हैं कि मेडिकल स्टोर की जांच ड्रग इंस्पेक्टर करते भी होंगे या नहीं।
ड्रग इंस्पेक्टर दीपक कुमार के पास ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले का चार्ज है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्षों से मेडिकल स्टोर की जांच तक ड्रग इंस्पेक्टरों ने नहीं की है।
सरकार की हीलाहवाली और पर्याप्त संख्या में ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती न होने से मेडिकल स्टोर स्वामियों की मनमर्जी चल रही है।