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कुमाऊं की जेलों में एक भी स्थायी डॉक्टर नहीं

Thu, 08 Sep 2016 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
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नैनीताल सहित कुमाऊं की अन्य जेलों में क्षमता से दो-तीन गुना अधिक कैदी मौजूद हैं, लेकिन जेलों में कैदियों की सेहत का ख्याल रखने के लिए एक भी स्थायी डॉक्टर मौजूद नहीं है। कैदियों के बीमार होने पर जेल अधिकारियों को बाहर से डॉक्टर बुलाना पड़ता है। कभी-कभी डॉक्टर के देर से आने पर ‘बहुत देर’ भी हो जाती है।
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हल्द्वानी जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्या ने बताया कि यहां क्षमता से तीन गुना अधिक कैदी है। एक कैंसर रोगी, एक टीबी और दस अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीज कैदी है। प्रतिदिन 40 से लेकर 50 कैदियों की ओपीडी होती है।

नैनीताल जेल में गंभीर रूप से बीमार कैदियों को हल्द्वानी जेल में स्थानांतरित कर दिया जाता है। सामान्य रूप से नैनीताल में भी औसतन 10 कैदी बीमार रहते हैं। दोनों जेल में एक भी डॉक्टर स्थायी रूप से तैनात नहीं है।
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इस समस्या से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं में सिर्फ सितारगंज की ही एक जेल में स्थायी डॉक्टर की तैनाती है।

अल्मोड़ा में भी स्थायी डॉक्टर नहीं

राज्य बनने के बाद से ही अल्मोड़ा जेल के अस्पताल में स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। कैदियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जेल में डॉक्टर की व्यवस्था की गई है। इसके तहत रोजाना डॉक्टर आकर बीमार कैदियों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं। जेल के अस्पताल में एक संविदा पर फार्मेसिस्ट तैनात है।

कैंसर रोगी को भेजा गया दिल्ली
लालकुआं की एक विचाराधीन महिला बंदी ब्लड कैंसर से पीड़ित है। जेल अधीक्षक मनोज आर्या के मुताबिक आज (बृहस्पतिवार) उसे एम्स में इलाज के लिए भेजा गया है। अभी तक गार्ड की कमी के चलते उसे दिल्ली नहीं भेजा जा रहा था। जेल अधिकारी स्थानीय अस्पताल में इलाज करा रहे थे।
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