दस दिनों से बच्चों के साथ लापता महिला को परिजनों ने रोडवेज बस स्टैंड से सुरक्षा गार्ड के साथ पकड़ लिया। गार्ड ने परिजनों को पीटकर भागने की कोशिश की, लेकिन परिजनों ने उसकी धुनाई करने के बाद कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया। थाने में महिला का कहना था कि गार्ड ने उसका धारी से बच्चों के साथ अपहरण कर लिया था। महिला और उसके गार्ड के बयान अलग-अलग होने के कारण पुलिस घटना को लेकर उलझ गई है।
ओखलकांडा मल्ला निवासी जीवन मोनी की पत्नी विमला 18 अप्रैल को अपने सास-ससुर से यह कहकर बच्चों को लेकर घर से निकली कि ननिहाल में समारोह में जा रही है। इसके बाद महिला लापता हो गई। पति ने पत्नी और बच्चों को ढूंढने के लिए कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। सोमवार को महिला ने अपने भाई को फोन कर भोटिया पड़ाव होटल आने के लिए कहा था। भाई और पति के पहुंचने पर महिला हस्तिनापुर निवासी गार्ड के साथ चली गई। पुलिस ने गार्ड की तलाश करने के लिए उसके बाइक और मोबाइल का नंबर लिया।
इधर, बुधवार को परिजनों ने रोडवेज में बस से उतरते समय महिला और बच्चों को पकड़ लिया। इस बीच गार्ड भागने लगा। पकड़ने पर वह मारपीट करने लगा। सूचना पर पहुंची पुलिस गार्ड के साथ दोनों पक्षों को पकड़कर कोतवाली ले आई। यहां गार्ड ने एसएसआई इंदर सिंह राणा को बताया कि वह हस्तिनापुर का रहने वाला है। वह महिला के जीजा मथुरा प्रसाद के साथ नौकरी करता है। महिला के बुलाने पर वह हल्द्वानी आया था। उधर, महिला का कहना था कि गार्ड उसे धारी से पकड़कर जबरदस्ती हल्द्वानी लाया था। वह बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर दिल्ली स्थित शीशगंज गुरुद्वारा लेकर गया था। वहां से हस्तिनापुर भी लेकर गया था। महिला का पति उसे घर लेकर जाने को तैयार नहीं था। पुलिस दोनों के बयानों को लेकर खुद उलझ गई है। पुलिस सत्यता की जांच के लिए काल डिटेल मंगा रही है।