रानीबाग रेस्क्यू सेंटर बनाने के वक्त दावा किया गया कि बीमार और घायल वन्यजीवों का इलाज होगा, पर यह सेंटर केवल दिखावा साबित हो रहा है। इसी सेंटर से कुछ दूरी पर गौला बैराज के पास एक बीमार नर तेंदुए (सात साल) ने घंटों तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। उसका इलाज तो दूर जंगलात उसे रेक्स्यू तक नहीं कर सका। वन विभाग सीमा विवाद में ही उलझा रहा। बाद में मरे तेंदुए को गांव वाले जंगल से निकाल कर लाए।
गौला बैराज पर जंगल से सटे इलाके में सिंचाई विभाग बाउंड्री बना रहा है। गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे मजदूर जंगल की तरफ गए, तो वहां उन्होंने एक तेंदुए को देखा। घबराए मजदूरों ने भागकर सिंचाई विभाग के लोगों को जानकारी दी। इसी बीच लोगों को भी बैराज के पास तेंदुआ होने की खबर मिली तो वह बड़ी संख्या में वहां पहुंचने लगे। सिंचाई विभाग के कर्मियों ने वन महकमे को सूचना दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बड़ी मुश्किल से हल्द्वानी वन प्रभाग छकाता रेंज के दो कर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन वह भी तेंदुए के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। बाद में पता चला कि मामला नैनीताल वन प्रभाग है, तो मनोरा रेंज के कर्मियों को सूचना दी गई। इसी बीच घंटों तड़पने के बाद तेंदुए ने करीब तीन बजे दम तोड़ दिया।
अंत में हिम्मत कर ग्रामीण ही उसे उठाकर लाए। बाद में मनोरा रेंज की टीम तेंदुए की लाश लेकर नैनीताल चिड़ियाघर चली गई। आरओ मनोरा मुकुल शर्मा का कहना है कि तेंदुआ नर है, जिसकी उम्र करीब सात साल है। प्रथमदृष्ट्या मौत का कारण बीमारी लग रही है। असली कारणों का पता पोस्टमार्टम के बाद ही चल पाएगा।
आज होगा पोस्टमार्टम
नैनीताल। जू के रेंज अफसर मनोज साह ने बताया कि तेंदुए का पोस्टमार्टम शुक्रवार को किया जाएगा। पशु चिकित्सकों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा।