फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एसटीएच में डाक्टरों की लापरवाही से अब मासूम की मौत

Mon, 20 Apr 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
विज्ञापन
सुशीला तिवारी अस्पताल में डाक्टरों की लापरवाही से अब एक नवजात की मौत हो गई। रविवार सुबह साढ़े पांच बजे डाक्टरों को नवजात की तबियत बिगड़ने की जानकारी दी गई, लेकिन ढाई घंटे बाद तक किसी भी डाक्टर ने न तो नवजात को देखा और न ही मामले को गंभीरता से लिया। इस पर सुबह 8.10 बजे नवजात ने दम तोड़ दिया। इससे भड़के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया।
विज्ञापन


दोषी डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई न होने तक परिजनों ने नवजात का शव ले जाने से मना कर दिया। हंगामा बढ़ता देख प्राचार्य ने दो डाक्टरों को निलंबित कर मामले की जांच कराने के आदेश दिए। एसटीएच में डाक्टरों की लापरवाही से मौत का एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा मामला है।

14 अप्रैल को तीनपानी निवासी पत्रकार तारा चंद्र जोशी की पत्नी किरण जोशी की एसटीएच के डाक्टरों की लापरवाही से जान चली गई। इसके बाद भी डाक्टर नहीं सुधरे और रविवार को एक नवजात की जान डाक्टरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। भोलानाथ गार्डन निवासी केवल पाठक की पत्नी रेखा पाठक की 17 अप्रैल को सुशीला तिवारी अस्पताल में डिलीवरी हुई थी। रेखा की बच्ची की तबियत रविवार सुबह साढ़े पांच बजे बिगड़ गई।
विज्ञापन


रेखा के पति केवल पाठक ने डा. अपूर्व कुमार दत्ता से बच्ची को बुखार होने की बात कही, मगर उन्होंने देखने से मना कर दिया। पाठक ने बताया कि डाक्टर ने कहा कि सिस्टर को दिखाओ। सिस्टर से पाठक ने बच्ची को देखने की गुहार लगाई। सिस्टर ने जवाब दिया कि यह मेरा काम नहीं है। पाठक ने बताया कि बाल रोग विभाग के प्रोफेसर डा. अजय आर्या को भी बुलाने को कहा, मगर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। डा. अपूर्व दत्ता ने परिजनों से अभद्रता की और बच्ची को अस्पताल से ले जाने को कहा। सुबह लगभग 8.10 मिनट पर नवजात ने दम तोड़ दिया।

नवजात की मौत होने पर परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर भाजयुमो के मदन मोहन जोशी भी अस्पताल पहुंचे। हंगामा बढ़ते देख डा. अपूर्व दत्ता अस्पताल से चले गए। जोशी की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) डा.एके पांडे से भी जमकर नोकझोंक हुई। इसके बाद मौके पर पहुंचे प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित को आक्रोशित लोगों ने घेर लिया और कार्रवाई की मांग करने लगे। प्राचार्य डा. पुरोहित ने कार्रवाई और जांच कराने का आश्वासन दिया, मगर परिजन नहीं माने और डाक्टरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई न होने पर नवजात के शव को अस्पताल से नहीं ले जाने की जिद पर अड़ गए। डा. पुरोहित ने पीजी के छात्र डा. अपूर्व दत्ता और जूनियर रेजीडेंट डा. तपस्या रेड्डी को निलंबित करने के लिखित आदेश दिए। डाक्टरों के निलंबित होने और जांच का आश्वासन मिलने के बाद परिजन शांत हुए। केवल पाठक मंगलवार को डाक्टरों की लापरवाही से जान गंवाने वाली किरण जोशी के ममेरे भाई हैं।

कार्रवाई के नाम पर कर दिया छात्र डाक्टरों को निलंबित
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित ने जिन दो डाक्टरों को निलंबित किया है, वे मेडिकल कालेज के छात्र हैं। दोनों ही डाक्टर मेडिकल कालेेज में नौकरी नहीं कर रहे हैं। प्राचार्य ने गायिनी विभाग के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि मामला बाल रोग विभाग का था। आखिर बाल रोग विभाग के डाक्टरों को क्यों बचाया जा रहा है। डा. अपूर्व दत्ता एमएस सर्जरी की पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ दिनों बाद पेपर देकर कालेज से चले जाएंगे। डा. तपस्या की पीजी भी 2016 में पीजी पूरी हो जाएगी। प्राचार्य की गायिनी यूनिट के अंडर में रेखा भर्ती थी और नवजात डा. अजय आर्या की यूनिट के अंडर में भर्ती थी, ऐसे में सवाल यह उठता है कि दोनों यूनिट के डाक्टरों या जिम्मेदार विशेषज्ञों के खिलाफ प्राचार्य ने कार्रवाई क्यों नहीं की। परिजनों से अभद्रता करने वाली सिस्टर को क्यों बचाया जा रहा है।

प्राचार्य के बुलाने पर भी नहीं आए डा. दत्ता
नवजात की मौत पर हंगामा होने के बाद डा. अपूर्व दत्ता अस्पताल से चले गए। प्राचार्य ने उनका मोबाइल मिलवाया तो स्विच आफ आया। प्राचार्य ने डा. दत्ता को बुलाने के लिए एक कर्मचारी को घर भेजा, मगर वे घर में भी नहीं थे। प्राचार्य ने दोनों डाक्टरों के निलंबन की घोषणा लाउडस्पीकर से कराई।

एनआईसीयू में क्यों नहीं ले गए नवजात को
नवजात बुखार से तप रही थी और उसे एनआईसीयू (नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में ले जाने के बजाए इमरजेंसी की ओटी में क्यों ले जाया गया। इस सवाल का जवाब प्राचार्य के पास भी नहीं था।

इन मामलों में नहीं आई जांच रिपोर्ट
= पिछले वर्ष 23 सितंबर को इंदिरा नगर निवासी मो. इश्तियाक ने अपनी बच्ची को हालत बिगड़ने पर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया था। डाक्टर और स्टाफ की लापरवाही के चलते बच्ची की मौत हो गई थी।
= लाइन नंबर 16 निवासी मो. अय्यूब (65) की पिछले वर्ष 21 दिसंबर को मौत हो गई थी। परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर तोड़फोड़ की थी।
= इंदिरा नगर निवासी सोनू ने शोएब (शिशु) को उल्टी-दस्त होने पर सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया था। नौ मार्च को शोएब की मौत हो गई थी।
= 13 जनवरी को मुक्तेश्वर से आए घायल बच्चे को अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से मना कर दिया था। चोटिल बच्चा बिना इलाज के करीब 5:30 घंटे तड़पता रहा। मामला डीएम तक पहुंचने पर उन्होंने एसडीएम को मौके पर भेज कर इलाज कराया और रेफर किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें